काठमांडू में ‘मातृभाषा रत्न’ से सम्मानित डॉ. बीरेन्द्र कुमार महतो का टीआरएल संकाय में अभिनंदन
अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर काठमांडू में हुआ सम्मान
रांची विश्वविद्यालय के टीआरएल संकाय में सहायक प्राध्यापक डॉ. बीरेन्द्र कुमार महतो ‘गोतिया’ को नेपाल की राजधानी काठमांडू में “मातृभाषा रत्न” अंतर्राष्ट्रीय मानद उपाधि मिलने पर सम्मानित किया गया। यह सम्मान शब्द प्रतिभा बहुक्षेत्रीय सम्मान फाउंडेशन नेपाल द्वारा प्रदान किया गया।
रांची : रांची विश्वविद्यालय के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा (टीआरएल) संकाय अंतर्गत स्नातकोत्तर नागपुरी विभाग में आज एक गरिमामय समारोह में सहायक प्राध्यापक डॉ. बीरेन्द्र कुमार महतो ‘गोतिया’ का अभिनंदन किया गया। हाल ही में उन्हें काठमांडू में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस समारोह में “मातृभाषा रत्न” अंतर्राष्ट्रीय मानद उपाधि से सम्मानित किया गया है।

नागपुरी विभाग में आयोजित सम्मान समारोह में उन्हें मोमेंटो, अंगवस्त्र और पुष्पगुच्छ भेंट कर अभिनंदित किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रीझु नायक ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन आलोक कुमार मिश्रा ने दिया।
अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. उमेश नन्द तिवारी ने कहा, “यह सम्मान किसी एक साहित्यकार का नहीं, बल्कि माटी की भाषा और उसकी अस्मिता का वैश्विक सम्मान है। मातृभाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि लोकजीवन की स्मृति, संस्कृति और सामूहिक आत्मा की वाहक होती है।” उन्होंने कहा कि डॉ. महतो एक लोकप्रिय शिक्षक, संवेदनशील साहित्यकार, रंगकर्मी और लोकधर्मी कलाकार के रूप में नागपुरी भाषा को अकादमिक और सांस्कृतिक दोनों स्तरों पर नई ऊँचाई प्रदान कर रहे हैं।
डॉ. महतो की रचनात्मकता साहित्य, रंगमंच और कठपुतली कला के माध्यम से समाज में सकारात्मक चेतना का संचार करती रही है। उनकी सृजन-यात्रा जनपक्षीय विचारधारा और लोकसंस्कृति की जड़ों से जुड़ी हुई है, जिसने नागपुरी भाषा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उनके सम्मान की सूचना मिलते ही झारखंड के साहित्यिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में हर्ष और गौरव का वातावरण है। शिक्षाविदों और साहित्यप्रेमियों ने इसे झारखंडी भाषाओं के लिए प्रेरक उपलब्धि बताया।
डॉ. महतो ने अपने संक्षिप्त संबोधन में कहा कि यह उपलब्धि व्यक्तिगत नहीं, बल्कि झारखंड की माटी, उसकी लोकसंस्कृति और नागपुरी भाषा के प्रति सामूहिक समर्पण का परिणाम है। उन्होंने मातृभाषा के संरक्षण, शोध और सृजन को निरंतर आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।
समारोह में टीआरएल संकाय के प्राध्यापक डॉ. किशोर सुरिन, डॉ. बन्दे खलखो, डॉ. दिनेश कुमार दिनमणि, डॉ. उपेन्द्र कुमार, डॉ. करमी मांझी, डॉ. अमित अरुण तिग्गा, डॉ. रामजय नाईक, हरेन्द्र लोहरा, अनुप गाड़ी, सोनू सपवार, धीरज नायक, धर्मेन्द्र कुमार, अनिता कुमारी सिंह, शिखा कुमारी, बुद्धेश्वर बड़ाइक, पप्पू कुमार महतो, अनिता, सुनीता, वीणा, सृष्टि, राज, अजीत और रीना सहित विभाग के अन्य शिक्षक, शोधार्थी और छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.
