Koderma News: लोक अदालत का बढ़ता प्रभाव: समय और पैसे की बचत के साथ मुकदमों के बोझ से मिली मुक्ति
चेक बाउंस मामलों पर प्रहार: एक ही छत के नीचे 223 वादों का निपटारा
कोडरमा में झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देशानुसार आयोजित विशेष लोक अदालत में कुल 223 वादों का निष्पादन किया गया। प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अमित कुमार वैश के मार्गदर्शन में सात बेंचों का गठन हुआ, जिसमें चेक बाउंस और अन्य मामलों की त्वरित सुनवाई की गई। इस अवसर पर न्यायाधीश ने लोक अदालत को शीघ्र, सस्ता और सुलभ न्याय का सशक्त माध्यम बताते हुए इसके अंतिम और सर्वमान्य निर्णय के महत्व पर जोर दिया। इस सफल आयोजन में न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं के सहयोग से विभिन्न विभागों के मामलों का निपटारा कर राजस्व की वसूली भी सुनिश्चित की गई।
कोडरमा: झारखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार रांची के निर्देश के आलोक में कोडरमा के प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार अमित कुमार वैश के कुशल मार्ग दर्शन में व जिला विधिक सेवा प्राधिकार कोडरमा के तत्वावधान में व्यवहार न्यायालय परिसर में आज शनिवार को चेक बाउंस मामलो से सम्बंधित विशेष लोक अदालत सह मासिक लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस मौंके पर प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार अमित कुमार वैश ने कहा कि आज के वर्तमान परिवेश में लोक अदालत किसी परिचय की मोहताज नहीं है यही कारण है कि इसकी लोकप्रियता दिन प्रति दिन बढती जा रही है।
उन्होंने कहा कि लोक अदालत में दिए गए फैसले में दोनों पक्षों की जीत होती है तथा यह फैसला दोनों पक्षों को संतुष्ट करता है। कोई पक्ष इसे थोपा हुआ महसूस नहीं करता है। लोक अदालत में दिए गए निर्णय के विरुद्ध कहीं भी कोई अपील नहीं होती। लोक अदालत का निर्णय अंतिम निर्णय होता है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत शीघ्र, सस्ता और सुलभ न्याय प्रदान करने का सशक्त माध्यम है। लोक अदालत का फैसला अंतिम होता है। उन्होने कहा कि लोक अदालत में बढ़ रही भीड़ इस बात का परिचायक है कि लोक अदालत आम लोगों के बीच कितना लोकप्रिय होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत में जहाँ एक ओर लोगों के समय और पैसे की बचत होती है वहीँ दूसरी ओर न्यायालय से मुकदमों का बोझ कम होता है।



