राज्यसभा चुनाव: भाजपा से दीपक प्रकाश की मजबूत दावेदारी, झामुमो से कल्पना की संभावना नहीं

दूसरी सीट को लेकर भाजपा और इंडिया गठबंधन के बीच मुकाबले की चर्चा

राज्यसभा चुनाव: भाजपा से दीपक प्रकाश की मजबूत दावेदारी, झामुमो से कल्पना की संभावना नहीं
राज्यसभा चुनाव को लेकर झारखंड में सियासी हलचल तेज

झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भाजपा की ओर से उम्मीदवार उतारने की तैयारी के बीच दूसरी सीट को लेकर सियासी समीकरण लगातार बदल रहे हैं।

राज्यसभा चुनाव को लेकर झारखंड की राजनीति में हलचल तेज है। भाजपा की ओर से उम्मीदवार दिए जाने की घोषणा के बाद से इंडिया गठबंधन में खलबली है। दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव में झामुमो की एक सीट तो पक्की है, लेकिन असली लड़ाई दूसरी सीट के लिए है। भाजपा की दावेदारी भी दूसरी सीट पर ही है। भाजपा, झामुमो और कांग्रेस से टिकट के कई दावेदार हैं। झारखंड से चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर कर चुके परिमल नथवानी की वजह से दिलचस्पी बढ़ गई है।

हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि नथवानी को कौन-सा दल समर्थन दे रहा है। नथवानी भाजपा और इंडिया गठबंधन के नेताओं से संपर्क में हैं। नथवानी यदि चुनाव मैदान में आते हैं, तो बहुत संभव है कि वह निर्दलीय चुनाव लड़ें और विभिन्न दलों से समर्थन मांगें।

भाजपा में दावेदारों की बात करें, तो सबसे प्रबल और मजबूत दावेदार वर्तमान राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश हैं। दीपक प्रकाश का केंद्रीय नेताओं से बेहतर और सीधा संपर्क है। गृहमंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन सहित कई बड़े नेताओं से वह सीधे जुड़े हुए हैं। बिहार में चुनाव सह-प्रभारी की भूमिका निभा चुके हैं। बंगाल चुनाव में भी सक्रिय थे। दीपक प्रकाश वोट मैनेज करने की क्षमता भी रखते हैं। पिछले चुनाव में उन्होंने निर्दलीय सरयू राय और अमित यादव का समर्थन हासिल कर लिया था। इसलिए दीपक प्रकाश की दावेदारी मजबूत है। हालांकि, अन्य दावेदारों में पूर्व सांसद रवींद्र राय, बालमुकुंद सहाय, राकेश प्रसाद, प्रवीण सिंह, मनोज सिंह सहित कई नाम हैं।

पिछले दिनों यह खबर खूब चली कि पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, आशा लकड़ा और आईआरएस अधिकारी निशा उरांव में से किसी एक को भाजपा उम्मीदवार बना सकती है। लेकिन ऐसी कोई योजना भाजपा के पास न पहले थी और न अब है। अर्जुन मुंडा इस खबर का खंडन कर चुके हैं। उन्होंने कहा है कि वह राज्यसभा के दावेदार नहीं हैं। आशा लकड़ा की भी दूर-दूर तक संभावना नहीं है।

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निशा उरांव का पार्टी के लिए कोई योगदान नहीं है। अभी वह अधिकारी हैं। भाजपा में न उनकी ऐसी कोई पहचान है और न ही ऐसा योगदान कि उन्हें राज्यसभा का टिकट दे दिया जाए। वह भी ऐसी स्थिति में, जब पार्टी अपने बूते किसी को राज्यसभा भेजने की स्थिति में नहीं है। निशा उरांव दौड़ में कहीं नहीं हैं।

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चुनाव जीतने के लिए चार अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ेगी। वोट मैनेज करने की क्षमता रखने और विधायकों से बेहतर संबंध वाले व्यक्ति को ही पार्टी उम्मीदवार बनाएगी। यदि नथवानी को भाजपा ने समर्थन नहीं दिया, या फिर वह चुनाव लड़ने झारखंड नहीं आए, तो दीपक प्रकाश भारी पड़ सकते हैं।

झामुमो से कल्पना की संभावना नहीं

झारखंड मुक्ति मोर्चा का उम्मीदवार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तय करेंगे। मेरी जानकारी के अनुसार, विधायक व मुख्यमंत्री की पत्नी कल्पना सोरेन राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार नहीं होंगी। यदि परिवार से कोई उम्मीदवार नहीं हुआ, तो मुख्यमंत्री के नजदीकी किसी नेता को मौका मिल सकता है।

कल्पना सोरेन की चर्चा भी हवा-हवाई है। अभी ऐसी कोई स्थिति नहीं है कि कल्पना दिल्ली शिफ्ट हो जाएं। राज्य की राजनीति में अभी उनकी जरूरत है और वह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। सरकार चलाने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है। हर महत्वपूर्ण फैसले में उनकी भूमिका होती है।

कांग्रेस में भी दावेदारों की लंबी सूची है। पूर्व सांसद सुबोध कांत सहाय, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर और प्रदेश अध्यक्ष कमलेश महतो मजबूत दावेदार हैं। पूर्व राज्यसभा सांसद धीरज साहू ने चुनाव नहीं लड़ने की बात कही है।

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Edited By: Mohit Sinha
Mohit Sinha Picture

Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.

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