'मोदी सरकार गरीब-मजदूरों के लिए अभिशाप': माले का हल्ला बोल, मधुबन में लाल झंडों के साथ गूंजे इंकलाबी नारे
हटिया मैदान में सभा, बाजार में निकली सैकड़ों की रैली: 12 घंटे काम वाले लेबर कोड के खिलाफ गरजे नेता
गिरिडीह के मधुबन में असंगठित मजदूर मोर्चा और भाकपा माले के बैनर तले 'मजदूर दिवस सप्ताह' का भव्य आयोजन किया गया। हटिया मैदान में आयोजित इस सभा में नेताओं ने मोदी सरकार की नीतियों को मजदूर-विरोधी बताते हुए चार लेबर कोड का कड़ा विरोध किया। वक्ताओं ने डोली मजदूरों की समस्याओं और 12 घंटे की कार्य अवधि जैसे मुद्दों पर आंदोलन तेज करने का संकल्प लिया। रैली के माध्यम से क्षेत्र के मजदूरों, किसानों और शोषित वर्गों को एकजुट होकर संघर्ष करने का संदेश दिया गया।
गिरिडीह: असंगठित मजदूर मोर्चा और भाकपा माले के बैनर तले मंगलवार को मधुबन के हटिया मैदान में मजदूर दिवस सप्ताह का भव्य आयोजन हुआ। शहीद बेदी पर माल्यार्पण और झंडोत्तोलन के बाद सैकड़ों मजदूर-किसानों ने लाल झंडों के साथ मधुबन बाजार में रैली निकाली। 'इंकलाब जिंदाबाद' और 'मोदी सरकार होश में आओ' के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा।
"मजदूर-किसान एकजुट होकर करें हल्ला बोल": अजीत राय
असंगठित मजदूर मोर्चा के नेता अजीत राय ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, "मजदूर, किसान, असंगठित मजदूर, छात्र, बेरोजगार, महिला और गरीब को एकजुट होकर मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ हल्ला बोल करना होगा। डोली मजदूरों को सुविधा देने पर कोई सरकार ध्यान नहीं देती। शिकागो के शहीदों को याद कर हमें एकजुट होना है।"
"मोदी सरकार मजदूरों का अहित चाहती है": राजेश सिन्हा

"गरीबों के लिए अभिशाप बन गई मोदी सरकार": अशोक पासवान

वरिष्ठ माले नेता पूरन महतो ने कहा, "किसान, मजदूर, छात्र, महिला को लाल झंडे के साथ जुड़कर आंदोलन करने की जरूरत है।" माले नेता कन्हाई पांडेय ने संगठन विस्तार पर जोर देते हुए कहा कि डोली मजदूरों की समस्याओं पर सरकार का कोई ध्यान नहीं है।
मधुबन में मोर्चा की टीम द्वारिका राय, बसंत कर्मकार, हराधन तुरी, सूरज तुरी, मंसू हांसदा, योगेश्वर महतो, परशुराम महतो, रेशमी देवी, धर्मी देवी, सोहन महतो, चिरंजीवी महतो, लक्ष्मण महतो, चरण महतो, मंगर बास्के, मनोहर महतो, जागेश्वर महतो की मेहनत से सैकड़ों मजदूर-किसान सभा में जुटे।
कार्यक्रम में नागेश्वर महतो, चुन्नू तबारक, मसूदन कोल, लखन कोल, भीम कोल, दिलचंद कोल, धनेश्वर कोल, राजन तुरी, प्रसादी राय, चंदन टुडू, सकलदेव कोल, धूम्मा टुडू, गुलाब कोल समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद थे।
