ऑपरेशन साइबर-हॉक 4.0: ऑनलाइन निवेश के नाम पर ठगी करने वाला गिरोह पकड़ा, दो आरोपी गिरफ्तार

ऑपरेशन साइबर-हॉक 4.0: ऑनलाइन निवेश के नाम पर ठगी करने वाला गिरोह पकड़ा, दो आरोपी गिरफ्तार
(दिल्ली पुलिस लोगो)

ऑनलाइन निवेश और पार्ट-टाइम जॉब के नाम पर लोगों को ठगने वाले गिरोह का दिल्ली पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। ऑपरेशन साइबर-हॉक 4.0 के तहत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और कई अहम सबूत बरामद हुए हैं।

नई दिल्ली: राजधानी में साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच दिल्ली उत्तरी जिले की साइबर थाना पुलिस ने ‘ऑपरेशन साइबर-हॉक 4.0’ के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए ऑनलाइन निवेश के नाम पर लोगों को ठगने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपितों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से मोबाइल फोन और बैंक पासबुक बरामद की है।

उत्तरी जिले के पुलिस उपायुक्त राजा बांठिया ने शनिवार को बताया कि एक पीड़ित ने एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी कि उसे ऑनलाइन पार्ट-टाइम जॉब के नाम पर 1.46 लाख रुपये की ठगी का शिकार बनाया गया। आरोपित उसे टेलीग्राम के जरिए संपर्क में आए और ‘गूगल होटल रेटिंग’ जैसे छोटे-छोटे टास्क देकर शुरुआत में 125 रुपये का मुनाफा दिलाया, जिससे उसका भरोसा जीत लिया। इसके बाद पीड़ित को ‘प्रीपेड टास्क’ के नाम पर ज्यादा पैसे निवेश करने के लिए उकसाया गया। शुरुआत में 1000 रुपये निवेश करने पर 1300 रुपये वापस दिए गए, लेकिन फिर 3000, 20,000 और 30,000 रुपये के निवेश के बाद उसे निकासी के दौरान ‘गलती’ बताकर अकाउंट फ्रीज कर दिया गया। इसे अनफ्रीज करने के नाम पर उससे 50,000 और फिर 1 लाख रुपये की मांग की गई। आखिरकार जब उससे और 1.65 लाख रुपये मांगे गए, तब उसे ठगी का एहसास हुआ।

पुलिस उपायुक्त के अनुसार मामले की जांच के लिए एसआई अरविंद यादव के नेतृत्व में टीम गठित की गई। तकनीकी जांच में व्हाट्सएप, गूगल डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और करीब 200 मोबाइल नंबरों का विश्लेषण किया गया। जांच के दौरान संदिग्ध लोकेशन लुधियाना में ट्रेस हुई, जिसके बाद पुलिस टीम वहां रवाना हुई। चार दिन तक चले ऑपरेशन में कई किलोमीटर की दूरी तय कर पुलिस ने लुधियाना के तिब्बा रोड से आरोपित पुनीत शर्मा (43) को गिरफ्तार किया। पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर दूसरे आरोपित मनीष (29) को चार अप्रैल को दिल्ली के किंग्सवे कैंप इलाके से दबोचा गया, जो गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहा था।

बैंक अकाउंट बेचकर करता था ठगी का नेटवर्क तैयार

जांच में सामने आया कि पुनीत शर्मा ने अपने पांच बैंक खाते मनीष को बेचे थे। मनीष इन खातों को आगे अन्य लोगों को 15,000 रुपये प्रति अकाउंट के हिसाब से देता था। मनीष पेटीएम में काम करता है और दुकानों पर क्यूआर स्कैनर लगाने के कारण उसे बैंकिंग सिस्टम की अच्छी जानकारी थी। वह ठगी के पूरे नेटवर्क में अहम कड़ी के रूप में काम कर रहा था। पुलिस ने आरोपितों के पास से दो मोबाइल फोन और एक पासबुक बरामद की है, जिनमें बैंक खातों और लेन-देन से जुड़े अहम चैट और दस्तावेज मिले हैं। वहीं जांच में एनसीआरपी पोर्टल पर इस तरह की चार अन्य शिकायतें भी सामने आई हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ऑनलाइन निवेश के नाम पर ऊंचे मुनाफे का लालच देने वाले ऑफर्स से सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत शिकायत करें।

Edited By: Samridh Desk

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