Opinion: सनातन और हिन्दुओं की आस्था से खिलवाड़ का खतरनाक सिलसिला

लेख में संसद परिसर में हुए विरोध प्रदर्शन और उसके राजनीतिक संदेश पर चर्चा

Opinion: सनातन और हिन्दुओं की आस्था से खिलवाड़ का खतरनाक सिलसिला
फोटो: अजय कुमार (फाइल फोटो), ग्राफिक: समृद्ध झारखंड

वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार के इस विचार लेख में राम मंदिर दानपात्र विवाद, संसद परिसर में हुए विरोध प्रदर्शन और सनातन पर हो रही राजनीतिक बहस का विश्लेषण किया गया है। लेखक का दावा है कि कुछ राजनीतिक घटनाक्रमों के जरिए हिंदू आस्था और संत परंपरा को निशाना बनाया जा रहा है।

बात 28 मई 1996 की है। लोकसभा में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अपनी सरकार के लिए विश्वास मत हासिल करने के दौरान संसद में भाषण दे रहे थे। इसी भाषण में उन्होंने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को राम मंदिर/अयोध्या मुद्दे पर चेताया था कि आपको बीजेपी से लड़ना है, राम से मत लड़िए। उसी दौरान पीछे बैठे किसी सांसद की तरफ से आवाज आई कि 'राम से लड़ोगे तो निपट जाओगे।' जैसी टिप्पणी का उल्लेख भी वायरल रूप में मिलता है, लेकिन यह शब्द कहने वाले का चेहरा सामने नहीं आया। परंतु हकीकत यही रही कि कांग्रेस प्रभु श्री राम से लड़ते-लड़ते अपने सबसे बुरे दौर में पहुंच गई है। कांग्रेस ने कभी राम के अस्तित्व को नकारा तो कभी राम सेतु के बारे में गलत बयानी की। यहां तक कि कांग्रेस के नेता और प्रधानमंत्री अयोध्या जाने तक से कतराते थे। अयोध्या जाते भी तो प्रभु श्री राम के दर्शन नहीं करते थे। यही क्रम आज भी चल रहा है। रामलला के मंदिर में चंदा चोरी की घटना के नाम पर आज भी कांग्रेस ऐसा ही कर रही है। चंदा चोरी के बहाने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने सनातन और हिन्दुओं की आस्था को तार-तार करने की सभी हदें पार कर ली हैं।अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए जाने वाले चढ़ावे और दानपात्र से हुई कथित गड़बड़ी का मुद्दा इस समय देश की राजनीति के केंद्र में है। जहां एक तरफ अयोध्या में ट्रस्ट और पुलिस प्रशासन इस पूरे मामले की गहन जांच में जुटा है और विशेष जांच टीम गठित कर संदिग्ध कर्मचारियों व सेवादारों की भूमिका खंगाल रही है, वहीं दूसरी ओर सनातन प्रेमी जनता और साधु-संतों में इस बात को लेकर भारी रोष है कि जांच के निष्कर्षों की प्रतीक्षा किए बिना संपूर्ण साधु समाज और सनातन परंपरा को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की जा रही है। अयोध्या के सम्मानित संतों का स्पष्ट कहना है कि किसी भी मंदिर परिसर में यदि कोई आपराधिक तत्व या कर्मचारी गलत कार्य में लिप्त पाया जाता है, तो उसे कठोरतम दंड मिलना चाहिए, लेकिन उस बहाने भारत की हजारों वर्ष पुरानी साधु-संत परंपरा और भगवा वस्त्रों का राजनीतिक तमाशा बनाना सर्वथा अनुचित है।

संसद के मानसून सत्र के दौरान जिस प्रकार का दृश्य देखने को मिला, उसने पूरे देश के सनातन प्रेमी समाज को स्तब्ध और आक्रोशित कर दिया है। संसद परिसर के मकर द्वार पर पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को भगवा वस्त्र पहनाकर, माथे पर तिलक लगाकर और हाथ में दानपात्र थमाकर एक साधु की वेशभूषा में बैठाया गया। इसके बाद विपक्ष के नेताओं द्वारा एक पूर्वनियोजित नाटक (स्किट) मंचित किया गया, जिसमें तथाकथित साधु रूपी सांसद को दानपेटी में आए पैसों को अपनी जेब में डालते और फिर दानपात्र लेकर भागते हुए दिखाया गया। इस पूरे राजनीतिक नाटक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव, सपा के अयोध्या (फैजाबाद) से सांसद अवधेश प्रसाद समेत 'इंडिया' गठबंधन के कई प्रमुख नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। राहुल गांधी ने उस नाटक में बाकायदा दान देने का अभिनय किया, जिसके बाद अखिलेश यादव की पार्टी के नेताओं और अन्य विपक्षी सहयोगियों ने इस पूरे घटनाक्रम का आनंद लेते हुए नारेबाजी की।इस पूरे प्रकरण पर जब समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर इस प्रदर्शन का समर्थन किया, तो देश भर के अखाड़ों, विद्वानों और नागरिकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। जनमानस का मानना है कि लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराने के अनेक संवैधानिक और मर्यादित तरीके मौजूद हैं। परंतु भारत के सर्वोच्च विधायी सदन, संसद भवन के परिसर का उपयोग इस प्रकार के निम्नस्तरीय नाटकों और भगवाधारी संतों की छवि को 'चोर' के रूप में चित्रित करने के लिए करना संसदीय मर्यादाओं का चीरहरण है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी सदन और उसके परिसर में इस प्रकार वेश बदलकर नौटंकी करने पर अपनी सख्त नाराजगी जताई और स्पष्ट शब्दों में कहा कि संसद भवन देश के नीतिगत मुद्दों और जनसमस्याओं पर चर्चा के लिए है, न कि इस तरह के तमाशों के लिए। कानूनी विशेषज्ञों और संतों का मानना है कि धार्मिक प्रतीकों, भगवा वस्त्रों और साधु वेश का सार्वजनिक अपमान कर करोड़ों सनातनियों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इस कृत्य पर सर्वोच्च अदालत को स्वयं संज्ञान लेते हुए कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी राजनीतिक लाभ के लिए देश की आस्था का ऐसा उपहास न उड़ाया जा सके।

Jharkhand Govt Ad
सनातन धर्म और उसकी परंपराओं को कटघरे में खड़ा करने या उनके खिलाफ रणनीतिक बयानबाजी करने का विपक्ष का यह कोई पहला प्रयास नहीं है। इतिहास साक्षी है कि पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक लाभ साधने के लिए कई बार ऐसी बयानबाजियां की गईं, जिनसे बहुसंख्यक समाज की आस्था को ठेस पहुंची। 'भगवा आतंकवाद' जैसा भ्रामक शब्द गढ़ने से लेकर स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा श्रीरामचरितमानस की चौपाइयों पर विवादित टिप्पणियां करने और उसकी प्रतियों को जलाने तक का घटनाक्रम देश ने देखा है। तमिलनाडु में डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन द्वारा सनातन धर्म की तुलना 'मलेरिया, डेंगू और कोरोना' से करते हुए इसे मिटाने का आह्वान करना और उस पर कांग्रेस व अन्य विपक्षी सहयोगियों की चुप्पी या अप्रत्यक्ष समर्थन, सनातन के प्रति उनकी सोच को उजागर करता है। कभी प्रभु श्री राम के अस्तित्व को अदालत में 'काल्पनिक' बताने वाला हलफनामा देना, तो कभी अयोध्या में भव्य मंदिर निर्माण के समय उसे केवल राजनीतिक चुनावी मुद्दा बताकर उसका बहिष्कार करना; यह पूरी श्रृंखला दर्शाती है कि विपक्ष का एक वर्ग वैचारिक रूप से सनातन प्रतीकों के प्रति आक्रामक रहा है।संसद के इस हालिया प्रदर्शन में एक और पहलू ने देश की जागरूक जनता को गहराई से सोचने पर मजबूर किया है। वह है गैर-हिंदू और मुस्लिम नेताओं की इस तरह के धार्मिक प्रतीकों से जुड़े विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय भागीदारी।

जब भी किसी अन्य धर्म या संप्रदाय के प्रतीकों, मान्यताओं या वेशभूषा की बात आती है, तो विपक्ष की ओर से सहिष्णुता, गंगा-जमुनी तहजीब और धार्मिक संवेदनशीलता के लंबे-चौड़े भाषण दिए जाते हैं। परंतु जब भगवा वस्त्र, साधु वेश और राम मंदिर जैसे विषय आते हैं, तो वही नेता अन्य धर्मों के सहयोगियों को साथ लेकर सार्वजनिक मंचों पर उनका उपहास उड़ाने में तनिक भी संकोच नहीं करते। किसी गैर-हिंदू नेता द्वारा सनातन धर्म के पूज्य प्रतीकों का मजाक उड़ाते हुए ताली बजाना या उस नाटक का हिस्सा बनना हिंदू समाज के भीतर एक गहरा अविश्वास पैदा करता है। यह दोहरा मापदंड न केवल समाज के सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि क्या धर्मनिरपेक्षता की परिभाषा केवल एक विशेष धर्म की आस्थाओं का अपमान करने तक ही सीमित रह गई है?अयोध्या के मुख्य अर्चक, अखाड़ा परिषद और काशी-मथुरा के प्रमुख संतों ने इस घटना के बाद एक स्वर में कहा है कि यदि राम मंदिर के किसी दानपात्र या प्रबंधन में कोई वित्तीय अनियमितता हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच हो और दोषी, चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे जेल भेजा जाए। संत समाज स्वयं पारदर्शिता का पक्षधर है। लेकिन इस घटना की आड़ लेकर पूरी संत परंपरा को भ्रष्ट, लुटेरा और चंदा चोर साबित करने की जो साजिश संसद के प्रांगण में रची गई, वह अक्षम्य है। जिस साधु वेश ने भारत को चरित्र, त्याग, ज्ञान और विश्व बंधुत्व का संदेश दिया, उस भगवा को संसद के मुख्य द्वार पर 'चोरी का प्रतीक' बनाकर पेश करना भारतीय संस्कृति पर सीधा प्रहार है। देश का सनातन प्रेमी समाज आज विपक्ष से यह सीधा प्रश्न पूछ रहा है कि आखिर राजनीतिक वैमनस्य में अंधे होकर देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आत्मा पर वार करने का यह सिलसिला कब थमेगा?

यह भी पढ़ें: हरमू नदी की दर्दभरी कहानी: कभी जीवनदायिनी, आज गंदे नाले में तब्दील

गूगल न्यूज से जुड़ें... Follow करें
चैनल से जुड़ें 👉
Edited By: Mohit Sinha
Jharkhand Govt Ad

Latest News

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: भारत के मुक्केबाज़ों का कमाल, 7 गोल्ड जीतकर कॉमनवेल्थ गेम्स में मचाई धूम कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: भारत के मुक्केबाज़ों का कमाल, 7 गोल्ड जीतकर कॉमनवेल्थ गेम्स में मचाई धूम
Sahebganj News: वन विभाग के आश्वासन के बाद भी गायब हुई लकड़ी, ग्रामीणों में भारी आक्रोश
Sahebganj News: सिविल सर्जन कार्यालय में प्रभारी प्रधान सहायक अश्वनी कुमार सिन्हा को दी गई विदाई
Dumka News: JCECEB ANM परीक्षा के लिए PREJHA फाउंडेशन लगाएगा निःशुल्क रजिस्ट्रेशन कैंप
Dumka News: विधायक बसंत सोरेन और उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने किया 'झारफल' कटहल यूनिट का उद्घाटन
Dhanbad News: एएमपी कोलियरी कर्मी मंटु महतो की इलाज के दौरान मौत, जीएम दफ्तर पर प्रदर्शन
Dhanbad News: कोयला चोरी रोकने को CISF का बड़ा एक्शन, विभिन्न क्षेत्रों में वाहन जांच
Pakur News: घाटचोरा में बाइक अनियंत्रित होकर पलटी, युवक गंभीर रूप से घायल
Pakur News: डॉ. प्रवीण कुमार संथालिया बने नए सिविल सर्जन, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का लिया संकल्प
Pakur News: सीएचसी में अब उपलब्ध है आधुनिक इलाज, मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत
Deoghar News: श्रावणी मेला 2026 में 4 अगस्त से शुरू होगी विशेष हेलीकॉप्टर सेवा
Giridih News: सर्वजन पेंशन योजना के 2.87 लाख लाभुकों के बैंक खाते में भेजे गए ₹58.34 करोड़