संघर्ष का दूसरा नाम है जीवन
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आकांक्षा राॅय
जीवन में इतना तो संघर्ष कर ही लेना चाहिए कि अपने बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए दूसरों का उदाहरण न देना पड़े। आज हम आपको रू-ब-रू कराने जा रहे हैं, झारखंड राज्य के नृत्य कला इलाके में रहने वाले जगन्नाथ महतो की कहानी से। जगन्नाथ महतो झारखंड के मॉडर्न हॉस्टल के गार्ड हैं। एक ओर अपनी जीवन शैली से समाज को प्रेरणा दे रहे हैं तो दूसरी ओर सरकार के विकास के दावों की सच्चाई को भी जगजाहिर कर रहे हैं।
जगन्नाथ महतो मॉडर्न हॉस्टल में 2017 से नौकरी कर रहे हैं। काम के ऐवज में उन्हें मात्र 5 हजार मिलते थे। 2019 के जनवरी माह से उन्हें न्यूनतम 6 हजार मिलते हैं। ऐसे में जीवन का गुजारा बमुश्किल हो पा रहा है। कम कमाई इनके चिंता का सबब बना हुआ है। चिंता से ये कम उम्र में भी उम्रगर दिखने लगे हैं। जगन्नाथ महतो ने दो शादियां की हैं। उनकी पहली पत्नी का नाम राधा देवी व दूसरी पत्नी का नाम कुंती देवी हैं। दूसरी शादी करने का कारण पहली पत्नी से बच्चे नही होने पर पारिवारिक दबाव था। कुंती से उन्हें एक बेटी हुई। 7 वर्षीय चमेली स्कूल जाती है।
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आज आप सभी को जगन्नाथ महतो की कहानी से रुबरु कराने के पीछे का अहम कारण यह है कि आज के इस तामझाम के जमाने में भी परिवार चलाने के लिए 6 हजार में एक गार्ड की नौकरी कर रहे हैं, वो भी बाहर से राजधानी रांची में रहकर। इसी पैसे से वे अपनी दो पत्नियों सहित बच्ची के लिये दो वक्त की रोटी जुटा रहे हैं। रोटी के साथ- साथ बेटी को शिक्षा भी दे रहे हैं । इनका ये संघर्ष हमारे वर्तमान व्यवस्था के दर्शन कराता है। कामकाज में ये इतने व्यस्त रहते हैं, कि अपने समय को बेवजह बर्बाद नही करते। कम पैसे में ईमानदारी के साथ जगनाथ महतो न सिर्फ समाज के लिये एक प्रेरणा का काम कर रहे हैं, बल्कि विकास पर किये जा रहे सरकारी दावों की पोल भी खोल रहे हैं, कि रोजगार का यहां कोई आभाव नही है। मन में इनके संभवतः एक ही सवाल कौंध रहे होंगे कि 7 साल की बिटिया बड़ी होकर होनहार बने। उम्मीद यह भी होगी कि उनका आनेवाला वक्त बदलेगा।
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Edited By: Samridh Jharkhand
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