क्यों न हम इसे विश्व शांति दिवस के रूप में मनाएं: साबिर
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खोरीमहुआ(गिरिडीह): खोरीमहुआ अनुमंडल क्षेत्र के सभी मुस्लिम समुदाय के अमन-पसंद अवाम की रहनुमाई में जुलूस-ए-मुहम्मदी का भव्य आयोजन किया गया। जिसमें लगभग 10 हजार लोगों ने हिस्सा लिया। नातख्वानी व तकरीरों के जरिये अपने आका मोहम्मद स.अ.व. के बारगाह में खिराज-ए-अकीदत पेश किया गया। इस दौरान पुरानी मस्जिद कोड़वाडीह, डूमरडीहा, महेशमरवा नवादा, सतगांवां, इटोचांच, लतबेद, जेरुवाडीह के साथ-साथ दारुल उलूम कादरिया के ओलेमा के सभी मस्जिदों के इमाम और इलाके के चर्चित स्थल घोड़थम्भा-महबूब चौक के दुकानदारों ने बच्चों के बीच मिठाइयां, फल फ्रूट्स बांट कर अपने आका के प्रति अकीदत का इजहार किया।
इस दौरान समाज सेवी मो. साबिर वारसी ने समाज को तोड़ने वाले इंसान को याद दिलाते हुए कहा कि हम जिस पैगम्बर हजरत मोहम्मद मुस्तफा के जन्म दिवस पर जश्न मना रहे है। उन्होंने ही कहा है कि अपने वतन से मोहब्बत करना ही ईमान का हिस्सा है। जिस समाज में रहते है उस समाज को खाना खाने से पहले पूछने का हुक्म दिया ताकि पडोसी भूखा न रहने पाए। दो टूटे हुए दिलों को जोडने वालों को जन्नत की बसारत दी। जंग के मैदान में भी सिर्फ अपने बचाव के लिए तलवार उठाया। खुद के ऊपर कूड़ा कर्कट फेंकने वालों के लिए भी सलामती की दुआ की। बेवाओं को भी जीने का हक दिया। मां के कदमों के नीचे जन्नत की बसारत दी। आज उसी सख्सियत का जन्मदिवस है क्यों न हम इसे विश्व शांति दिवस के रूप में मनाएं। जुलूस को नियंत्रित रखने में धनवार थाना के साथ-साथ समाज सेवी शामिल शफीक अंसारी ,अनवर अली,मंसूर आलम, सनौवर आलम,जाहिद हुसैन, रियाज अंसारी, अब्बास रजवी, हबीब सदर, डॉ. जावेद, इम्तियाज रजवी, अहमद रजा, खुर्शीद रजवी, मंसूर रजवी, हाजी डब्बू, सेराज अंसारी, फारूक रजवी, मुस्लिम अली, अजबुल मुखिया, सद्दीक सदर, दारुल उलूम कादरिया कमिटी, नवयुवक क्लब, तहरीक-ए-पैगाम कमिटी व सतगांवां महबूब चौक के नौजवानों का अहम योगदान रहा। गूगल न्यूज से जुड़ें... Follow करें
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Edited By: Samridh Jharkhand
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