करवा चौथ: ऐ चाँद जरा जल्दी उगना
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गुंजन गुप्ता
प्रतापगढ़ उ.प्र.
दो नैना तेरी राह तकेंगे

चन्दन से चौक पूरना कर कुमकुम से उसे सजाऊँगी
अमिया के पल्लव का द्वारे पर हम तोरण एक लगाएंगे
उपवन अपनी नींद लुटाकर मोहक मंगलगान कहेंगे!
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जल का कलश सजा करके तेरी नजर उतारुँगी
जुगनूं और सितारों को स्वागत में तेरे बुलाऊंगी
सप्त सरित के पावन जल से जब तेरे चरण पखारेंगे
आरति वंदन युगल करों से तुलसी माँ के पात करेंगे!
ऐ चाँद जरा जल्दी उगना, दो नैना तेरी राह तकेंगे..!!
एक तुम्हारे आने से दुःख सारा हर जाएगा
दरश तुम्हारा पाकर खुद ही सीमन्त मेरा भर जाएगा
नीरवता तज दोनों हाथों के खन-खन-खन कंगना खनकेंगे
चरण तुम्हारे छू कर चंदा सुख से मेरे अधर हँसेंगे!
ऐ चाँद जरा जल्दी उगना, दो नैना तेरी राह तकेंगे..!!
आह्लादित हो धड़कन मेरी बावरि सी हो जायेगी
गर्वित हो शुभ भाग्य पर अपने मन ही मन इतरायेगी
रोम-रोम भी चक्षु-पटों के घूँघट में सकुचायेंगे
कौमुदी की सांसों में घुलकर लज्जा के सब वसन तजेंगे!
ऐ चाँद जरा जल्दी उगना, दो नैना तेरी राह तकेंगे..!!
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Edited By: Samridh Jharkhand
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