Palamu News: कला के प्रति अनदेखी: पलामू में चित्रकारों का भविष्य अधर में, न कला दीर्घा न कोई स्थायी मंच
मेदिनीनगर में चित्रकला के विकास के लिए समर्पित कला दीर्घा और नियमित प्रदर्शनियों की मांग
पलामू में चित्रकला और चित्रकारों की उपेक्षा का मुद्दा सामने आया है। वरिष्ठ चित्रकार एवं लेखक अमन चक्र ने क्षेत्रीय कलाकारों की स्थिति पर चिंता जताते हुए शासन-प्रशासन से ठोस पहल की मांग की है। उनका कहना है कि पलामू में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन कलाकारों को उचित मंच, रोजगार और प्रोत्साहन नहीं मिल रहा।
पलामू: जीवन में कला का महत्व शरीर में इंद्रियों के समान है, जो मनुष्य को सही ढंग से जीना सिखाती है। कला के अभाव में जीवन केवल अराजकता और अव्यवस्था का पर्याय बनकर रह जाता है। कला के विभिन्न रूपों में चित्रकला का स्थान सर्वश्रेष्ठ माना गया है, जिसका इतिहास मानव सभ्यता की उत्पत्ति और पत्थरों की कंदराओं से शुरू होकर आज आधुनिक ड्राइंगरूम, होटल और वैश्विक बाजार तक फैला हुआ है। हालांकि, अरबों रुपये के इस विशाल विश्व बाजार के दौर में भी पलामू (मेदिनीनगर) में चित्रकला और चित्रकारों की स्थिति अत्यंत दयनीय बनी हुई है।
वरिष्ठ चित्रकार एवं लेखक अमन चक्र ने क्षेत्रीय स्तर पर चित्रकला और कलाकारों की उपेक्षा पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इस ओर शासन-प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया है।

अमन चक्र, वरिष्ठ चित्रकार एवं लेखक
उपेक्षा और प्रशासनिक उदासीनता के मुख्य बिंदु
बुनियादी ढांचे का अभाव: जिला मुख्यालय में संगीत, नाटक और नृत्य के लिए टाउन हॉल मौजूद है, वहीं खेल गतिविधियों के लिए पुलिस स्टेडियम व अन्य परिसर उपलब्ध हैं। इसके विपरीत, चित्रकला प्रदर्शनी या अभ्यास के लिए पूरे पलामू में एक भी कला दीर्घा (आर्ट गैलरी) उपलब्ध नहीं है।
जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की बेरुखी: न तो स्थानीय प्रशासन की ओर से चित्रकला को बढ़ावा देने के लिए कोई दीर्घकालिक योजना बनाई गई और न ही जनप्रतिनिधियों (सांसद-विधायक) ने इस दिशा में कोई ठोस पहल की।
वार्षिक आयोजनों की कमी: जिले में चित्रकारों के मनोबल को बढ़ाने और उनकी कृतियों को बाज़ार व दर्शक उपलब्ध कराने के लिए किसी प्रकार के वार्षिक कला उत्सव या राज्य/राष्ट्रीय स्तर के आयोजनों का अभाव है।
'सफेद हाथी' साबित न हो जाएं प्रतिभाएं
लेखक का मानना है कि यदि समय रहते चित्रकारों के भविष्य और चित्रकला के संरक्षण के लिए बुनियादी सुविधाएं (जैसे कला दीर्घा का निर्माण व नियमित प्रदर्शनी) उपलब्ध नहीं कराई गईं, तो यह उपेक्षित प्रतिभाएं आने वाले समय में जिले के लिए मात्र 'सफेद हाथी' बनकर रह जाएंगी।
क्षेत्रीय कलाकारों ने शासन, प्रशासन और जन-प्रतिनिधियों से मांग की है कि पलामू में चित्रकला के विकास के लिए जल्द से जल्द एक समर्पित कला दीर्घा का निर्माण कराया जाए और कलाकारों को सम्मानजनक मंच प्रदान किया जाए।









