सरहुल की शोभायात्रा में उमड़ा जनसैलाब
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– थिरके आदिवासी जन
रांची: प्रकृति पर्व सरहुल राजधानी रांची समेत पूरे झारखंड में हर्षोल्लास के साथ संपन्न हो गया। परंपरागत नृत्य के साथ हजारों की संख्या में युवक- युवतियां ने मांदर की थाप पर कदमताल किये। मुख्य पुजारी जगलाल पाहन ने पारंपरिक विधि- विधान से पूजा- अर्चना की। पूजा के लिए केकड़ा पकड़ कर लाया गया था, जिसका इसमें अलग महत्व है।
पूजा अनुष्ठान के बाद पारम्परिक वेश भूषा में युवक युवतियां नाचते थिरकते जुलूस की शक्ल में अखरा से निकले। दोपहर बाद विभिन्न अखाड़ों ने इस भव्य शोभायात्रा में हिस्सा लिया। इस बाबत आधुनिक नागपुरी गीत, खोरठा गीत एवं पारंपरिक वाद्य यंत्र के सुमधुर ध्वनियों से वातावरण गुंजायमान होता रहा। युवक- युवतियां एक दूसरे के हाथों में हाथ थामे एवं कदम से कदम मिलाकर नृत्य कर रहे थे। यह दृश्य काफी मनोहारी था। शोभायात्रा केन्द्रीय सरना स्थल सिरमटोली पहुंचकर सम्पन्न हुई।
राजधानी में मुख्य शोभायात्रा कांके स्थित हातमा, डोरंडा, बरियातू, हेसल, पिस्का मोड़, द मधुकम, रातू रोड, हरमू किशोर गंज, अरगोड़ा, कोकर आदि क्षेत्रों से भव्य जुलूस निकाली गई। शोभायात्रा में हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए, वहीं भव्य शोभायात्रा को देखने के लिए भी सड़क के दोनों ओर विभिन्न मकानों की छतों पर हजारों की संख्या में पुरुष व महिलाएं एकत्रित हुई थी। शहर में मुख्य शोभायात्रा निकाले जाने के दौरान इस मार्ग पर और विभिन्न मुख्य सड़कों पर वाहनों का परिचालन बंद रहा।
शोभायात्रा यात्रा में पर्यावण के संरक्षण से संबंधित कई झांकी भी निकाली गई। लाल पाड़ की साड़ी पहने युवतियां एवं धोती और कुर्ता में युवक अपने हाथों में सरना झंडा लिए इस शोभा यात्रा में शामिल हुए थे। शोभायात्रा को देखते हुए प्रशासन ने भी अपनी कमर कस रखी थी। विभिन्न चैक चैराहों पर जवानों को मुस्तैद किया गया था। सीसीटीवी के ड्रोन जी सहायता से भी असमाजिक तत्वो पर नजर रखी जा रही थी।
सरहुल शोभायात्रा को लेकर एहतियात के तौर पर रांची के विभिन्न बिजली सब स्टेशनों से बिजली आपूर्ति बाधित रही, देर शाम इसे चालू कर दिया गया। इस दौरान सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को बनाये रखने को लेकर राजधानी रांची में जिला प्रशासन की ओर से विशेश इंतजाम किये गये थे। शहर में में प्रवेश करनेवाले सभी बाहरी मार्गों पर ड्रॉप गेट लगाये गये थे। शोभायात्रा के दौरान शहरी क्षेत्र में भारी वाहनों के प्रवेश पर भी रोक रही। जबकि शहर में यातायात व्यवस्था सामान्य बनाये रखने के लिए पुलिस ने जगह- जगह बैरिकेटिंग कर रखी थी।
शोभायात्रा के दौरान कई सड़कों से वाहनों का रूट परिवर्तित कर दिया गया था। सुरक्षा को लेकर ड्रोन कैमरों से भी जुलूस की निगरानी की जा रही थी। झांकियों में आदिवासियों की परंपरा, वस्त्र और आभूषण को प्रदर्शित किया गया और जल, जंगल व जमीन की रक्षा का संकल्प दिखा। झांकियों को प्रथम, द्वितीय व तृतीय पुरस्कार के रूप में क्रमश 5001, 3001 और 2501 रुपए का पुरस्कार के अलावा सांत्वना पुरस्कार भी दिया गया।
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Edited By: Samridh Jharkhand
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