वन्यजीव- पर्यटन हेतु झारखंड की योजना बताएं केंद्रीय पर्यटन मंत्री
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रांची सांसद ने लोस में पूछा
रांची: स्थानीय सांसद संजय सेठ ने बुधवार को लोकसभा में पर्यटन मंत्री से जानना चाहा, कि देश में वन्यजीव व वन पर्यटन हेतु सरकार ने कौन सी योजना बनाई है। यदि बनाई है, तो झारखंड सहित विभिन्न राज्यों का ब्यौरा क्या है ? इसके विकास में स्थानीय समुदायों को शामिल करने के लिए कोई योजना बनाई गई है ?
रांची सांसद ने लोस में जानना चाहा, कि वन्य जीव व वन पर्यटन में झारखंड सहित अन्य राज्यों का विवरण क्या है ? विगत तीन वर्षों में सरकार द्वारा इसके बढ़ावा देने के लिए कितनी राशि मुहैया कराई है। पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रहलाद सिंह पटेल ने बताया पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एम.ओ.ई.एफ.सी.सी) ने कम प्रभावी प्राकृती पर्यटन को अपनाने के लिए वन व वन्यजीवन के क्षेत्रों में ईको पर्यटन पर एक नीति तैयार की है, जो संरक्षित क्षेत्रों सहित अन्य वन क्षेत्रों में उसके आसपास रहनेवाले स्थानीय समुदायों को शामिल करती है।
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बताया कि इको पर्यटन के माध्यम से काम मुहैया करा कर उससे रोजगार के अवसर प्रदान करती है। पर्यटन मंत्रालय द्वारा स्वदेश दर्शन के आधार पर पर्यटन के विकास के लिए 15 थीम आधारित क्षेत्रों में वन्यजीव व इको पर्यटन को चिन्हित किया है। जिसमें राष्ट्रीय पार्क, वन्यजीव, अभ्यारण्य, प्राकृतिक विरासत, स्थल व रिजर्व शामिल है। इस योजना के अन्तर्गत विकास के लिए परियोजनाएं राज्य सरकार के परामर्श से चिन्हीत की जाती है। इस परियोजना की राशि उपर्युक्त रिपोर्ट एवं योजना के अनुसार स्वीकृत की जाती है। झारखंड राज्य को स्वदेशी योजना को ईको और वन्यजीव के तहत परियोजनाओं के अनुसार धन राशि उपलब्ध करायी गई है।
झारखंड में वर्ष 2018-19 में ईको परिपथ दलमा- चांडिल, गेतलसुद, बेतला, राष्ट्रीय अभयारण्य, मिचैया, नेतरहाट के विकास के लिए 52.72 करोड़ रुपये दिये गए है। यह जानकारी सांसद के प्रेस प्रतिनिधि संजय पोद्दार ने दी।
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Edited By: Samridh Jharkhand
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