पारा शिक्षकों ने निकाली न्याय यात्रा

पारा शिक्षकों ने निकाली न्याय यात्रा

रांची: राज्य सरकार के खिलाफ पारा शिक्षकों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है और इनका आरोप है कि हमने अपने जिंदगी के कीमती 15 साल शिक्षक की नौकरी करते हुए दे दिया है। सरकार के नियमावली बनाने की शर्त पर आंदोलन को स्थगित किया, इसके 6 माह बीत जाने के बावजूद नियमावली नहीं बनी। अब बाध्य होकर हम उग्र आंदोलन करने को बाध्य हैं। रविवार को राजधानी छोड़ बाकि पूरे झारखंड में पारा शिक्षकों ने न्याय यात्रा निकाली।
इस आक्रोश यात्रा के तहत इन्होंने शिक्षा मंत्री व शिक्षा सचिव के खिलाफ जमकर नारे लगाये। इन्होंने सरकार व शासन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। कहा कि सरकार ने राज्यव्यापी हड़ताल के दौरान सरकार ने 90 दिनों के अंदर स्थायीकरण समेत अन्य विषयों के समाधान का भरोसा दिलाया था, जैसे-जैसे समय गुजरता गया, वैसे-वैसे सरकार के मनसूबे अब तक साफ नहीं हुए। पारा शिक्षकों के हित में इनके द्वारा एक भी काम नहीं किया गया है। पारा शिक्षकों का कहना है कि यदि हमारे हित में कोई भी काम होता, तो हमें अहसास होता, कि सरकार कुछ सोच रही है, लेकिन यह विडंबना है, कि ऐसा कुछ भी नहीं किया गया। आखिरकार बाध्य होकर हमें आज के दिन न्याय यात्रा निकालना पड़ा। चतरा पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा के बैनर तले सभी जिला कमेटी के सदस्यों कमेटी के सदस्यों, सीआरसी व सभी राज्य प्रतिनिधि इस न्याय यात्रा में शामिल हुए। इन्होंने दावा किया कि पूरी मजबूती के साथ यह लड़ाई हम अंतिम समय तक जारी रखेंगे।
बोकारो में निकाले गये आक्रोश रैली में पारा शिक्षकों ने यह चेतावनी दी है कि अगर जल्द से जल्द 5 सितंबर तक नियमावली नहीं बनाई गई तो 6 सितंबर को रांची के मोरहाबादी मैदान में सभी राज्यभर के पारा शिक्षक उग्र आंदोलन के लिए बैठक करेंगे साथ ही पारा शिक्षकों ने आगामी विधानसभा चुनाव राज्य के सत्तारूढ़ सरकार को सबक सिखाने का काम करेंगे। संघर्ष समिति के बोकारो जिला अध्यक्ष नारायण महथा ने कहा कि राज्य सरकार ने पारा शिक्षकों की हड़ताल को खत्म करने के लिए 30 दिन के अंदर नियमावली बनाने की बात कही थी, लेकिन आज 270 दिन बाद भी आनाकानी की जा रही है। कहा कि बीजेपी का कोई विधायक हमें सहयोग करने के लिए तैयार नहीं है। विधायक कहते हैं, कि मुख्यमंत्री आपके लिए कोई कदम उठाने को तैयार नहीं है। इन्होंने कहा कि अगर पांच सितंबर तक नियमावली की घोषणा नही होती है, तो सभी को मिलकर त्यागपत्र देने के साथ-साथ आत्मदाह करने का ऐलान करना होगा।
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Edited By: Samridh Jharkhand
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