मानसून का कहर: 200 से अधिक गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कटा
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ट्रेनों का परिचालन बाधित, पुल-पुलिया ध्वस्त
रांची: देशभर में लौटता मानसून कहर बनकर गुजर रहा है। यूपी, बिहार, उत्तराखंड, हिमाचल, झारखंड, मध्यप्रदेश व महाराष्ट्र के कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। इन राज्यों में पिछले पांच दिनों से भारी बारिश का दौर जारी है। इस बाबत कईयों की जान जा चुकी है। सितंबर का आखिरी हफ्ता है और मानसून अपने आखिरी पड़ाव में है। 60 साल में पहली बार इस साल मानसून के 15 दिन की देरी से लौटने का अनुमान है। मौसम विभाग के मुताबिक इस बार मानसून 15 अक्तूबर तक जारी रह सकता है। 1960 के बाद यह पहली बार है, जब मानसून इतनी देरी से अलविदा कहेगा।
मुसलाधार बारिश ने पूरे झारखंड में तबाही मचा कर रखी है। कई पुल और पुलिया बह गये। कई दर्जन कच्चे मकान गिर गये हैं और करीब 200 से ज्यादा गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट चुका है। जामताड़ा में मिट्टी का घर ढहने से एक महिला की मौत हो गयी। वहीं गुवा थाना क्षेत्र की दुधबिला पंचायत के बेतेरकिया गांव में ठनका गिरने से रायमुनी की मौत हो गई। गढ़वा, कोडरमा और गिरिडीह में एक-एक युवक बह गये। कोडरमा के डोमचांच में बाइक सवार आनंद महतो किसी तरह डूबने से बचे, जबकि उनकी बाइक नदी में बह गई। कोडरमा के कोलकाता-नई दिल्ली रेलखंड के ढिलवां-नाथगंज स्टेशन के पास बीती रात चट्टान टूट कर रेल पटरी पर जा गिरा। इससे अप व डाउन दोनों लाइन पर घंटों ट्रेनों का परिचालन बाधित रहा। कोडरमा- गिरिडीह रेलखंड के 18.1 किलोमीटर पर पटरी धंसने से रेल यातायात प्रभावित हुआ। रांची के इटकी में छह घर गिर गये, जब कि कई जगहों पर पेड़ गिरने की रिपोर्ट है।
मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो अभी भी बारिष पिछली बार की तुलना में 24 ये 25 प्रतिषत कम हुई है। बीएयू के नोडल पदाधिकारी डाॅ ए बदूद की मानें तो धान के लिए यह अच्छी बारिष है। इससे रोपा धान को फायदा होगा। उन्होंने मूंग,मक्का व अरहर के लिए इस बारिष को अच्छा बताया। ऊपरी और मध्यम जमीन वाले किसानों को खेतों से जल निकासी की सलाह दी गयी है। वैज्ञानिकों का कहना है यह बारिष सब्जियों के लिए भी फायदेमंद साबित होगा। बारिश के कारण राजधानी रांची समेत विभिन्न जिलों में हर ओर जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। साहिबगंज, चतरा, पलामू, गढ़वा, पाकुड़, दुमका, कोडरमा, धनबाद, जमशेदपुर, सरायकेला आदि जिलों में निचले इलाकों में घरों, दफ्तरों और अस्पतालों में भी पानी घुस गया है। इन इलाकों में जहां सैंकड़ों मिट्टी के घर ढह गए वहीं पेड़ गिरने और सड़कों पर जलजमाव से आवागमन बाधित है।
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Edited By: Samridh Jharkhand
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