किसान कन्वेंशन संपन्न, संघर्ष करने का संकल्प
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रांची: हूल दिवस के मौके पर रविवार को भारतीय किसान सभा झारखंड राज्य परिषद् के बैनर तले आहूत किसान कन्वेंशन की अध्यक्षता कर रहे पूर्व सांसद भुवनेश्वर मेहता ने देश की आजादी के लिए संघर्ष करने वाले धरती आबा बिरसा मुंडा समेत झारखंड के अन्य महान सपूतों वीर सिद्धो, कान्हू, चांद, भैरव, वीर बुधु भगत सहित उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हुये कहा, कि ये सभी झारखंड वासियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। इस बाबत दो मिनट का मौन रखकर उनका नमन किया गया।
इस बाबत किसानों के लिए आधार पत्र रखते हुए किसान सभा के प्रदेश महासचिव महेंद्र पाठक ने कहा कि हमें उनके जीवन से प्रेरणा लेकर भविष्य का मार्ग तय करना चाहिए। कहा कि इन्होंने झारखंड व देश की हिफाजत की, कि लेकिन हमारे नेताओं ने जंगल जमीन की बात करके सिर्फ उसे प्रदेशवासियों से छिनने का काम किया। कहा कि प्रदेश की रघुवर सरकार सिर्फ घोषणाओं वाली सरकार बन कर रह गई है। सरकार किसानों के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं कर रही किसानों को उसके उपज की उचित मूल्य नहीं दिया जा रहा है। किसान भूखे मर रहे हैं। आज तो सरकार पूंजीपतीयों के लिए खुद जमीन छीन रही है। उसके लिए सीएनटी व एसपीटी एक्ट में संशोधन किया, लेकिन झारखंड के किसानों ने पहली बार एकजुट होकर अलग-अलग तरीके से भी आंदोलन किया, जो अभी जारी है। श्री पाठक ने कहा कि हमें विस्थापन के दंश से किसानों को बचाना है। इस बाबत प्रमोद साव ने कहा कि किसान सभा देश के मेरुदंड है। सरकार किसानों को लेमन चूस दे रही है, लेकिन लेमन चूस से पेट नहीं भरता। इसी कारण किसान आत्महत्या कर रहे हैं, इसलिए किसान आंदोलन में गति देना होगा। इस बाबत गणेश महतो, पीके पांडेय, डॉ बीएन ओहदार, इंदु भूषण पाठक, हेमकांत मांझी, बनवारी साव, देवनंदन साहू, नेमध यादव, माजीद अंसारी सहित कई लोगों ने अपने विचार रखे।
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प्रस्ताव पास किये गये: इस बाबत निर्णय लिया गया कि मार्च 2020 तक किसान सभा की सदस्यता 100000 से अधिक करना, 2020 तक महिला समूह बनाकर कोल्ड स्टोरेज का निर्माण हेतु प्रयास करना, किसानों के फसल की लागत का लाभकारी मूल्य दिलाने हेतु संघर्ष करना, गैरमजरूआ जमीन का रसीद चालू कराने के लिए संघर्ष करना, 60 वर्ष उम्र के सभी किसानों को 10000 मासिक किसान पेंशन देने के लिए संघर्ष करना, किसानों की कर्ज माफी हो इसके लिए संघर्ष करना, जबरिया भूमि अधिग्रहण पर रोक लगाने के लिए संघर्ष करना, पहले पुनर्वास फिर विस्थापन के लिए संघर्ष करना 1 जुलाई से 6 जुलाई तक सभी प्रखंडों में खाद बीज, बिजली, कीटनाशक दवा के लिए धरना प्रदर्शन करना 1 सितंबर को सभी जिला मुख्यालय में रैली जनसभा एवं प्रदर्शन किसान की समस्याओं को लेकर आंदोलन करना, अक्टूबर माह में राज्य स्तरीय रैली, लांग मार्च सहित किसानों का महापड़ाव आयोजित करना अहम है।
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Edited By: Samridh Jharkhand
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