जिलों में जहां आदिवासियों की जनसंख्या 5 से 7% घटी है, वहीं कोल्हान में वृद्वी हुई है: नीलकंठ मुण्डा सिंह
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संतोष वर्मा
चाईबासा: झारखंड के अन्य जिलों में जहां आदिवासियों की जनसंख्या 5 से 7 फीसदी घटी है। वहीं कोल्हान में आदिवासियों की जनसंख्या में वृद्धि हुई है, हालांकि यह वृद्धि संतोषजनक नहीं है, लेकिन अन्य जिलों की तुलना में कोल्हान में आदिवासियों जनसंख्या बेहतर है। यहां पुरूषों की अपेक्षा महिलाओं की संख्या अधिक है। जबकि कोल्हान में अन्य जिलों की तरह ही पलायन और अधिक शिशु मृत्यु की समस्या है। कोल्हान में जनजातीय परामर्शदातृ की उपसमिति की चाईबासा में पहली बैठक में आदिवासियों की घटती जनसंख्या पर चर्चा की गई। जिसकी अध्यक्षता राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ मुण्डा सिंह ने किया। बैठक में भाजपा विधायक गंगोत्री कुजूर, शिवशंकर उरावं, झामुमो विधायक दीपक विरूआ और निरल पूर्ति भी मौजूद रहे। इसके आलावे डीसी अरवा राजकमल, विभिन्न समाजिक संगठन के सदस्य, बुद्धिजीवी, आदिवासी नेता मौजूद रहे।
बैठक में देश की आजादी के बाद आदिवासियों के घटती जनसंख्या के कारणों पर चर्चा की गई। सभी सदस्यों ने अपनी- अपनी राय दिया और आदिवासियों की घटती जनसंख्या पर कारणों का उल्लेख किया। हालांकि इस संबंध में उपसमिति के अध्यक्ष मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा ने अधिक जानकारी देने से इंकार कर दिया कि वे अभी अध्ययन कर रहे हैं और जब रिपोर्ट सौंपेंगे तो सारी बातों का उल्लेख करेंगे।
लेकिन टीएसी के दो महिला सदस्यों में शामिल मांडर से भाजपा विधायक गंगोत्री कुजूर ने हर्ष जताते कहा कि राज्य के अन्य जिलों में आदिवासियों की जनसंख्या 5 से 7 फीसदी घटी है, लेकिन कोल्हान में आदिवासियों की जनसंख्या लगभग 2 फीसदी बढी है।
वहीं कोल्हान की भाजपा नेत्री गीता बालमुचू ने कहा कि कोल्हान में बड़ी संख्या में आदिवासी ईसाई धर्म स्वीकार कर चूके हैं, लेकिन जनसंख्या गणना के समय वे खुद को आदिवासी की जगह ईसाई बताते हैं, इसलिए भी आदिवासियों की जनसंख्या घटती दिख रही है, भाजपा नेत्री ने टीएसी की बैठक में धर्मांतरण का मुद्दा उठाते हुए सरना कोड देने की मांग की।
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Edited By: Samridh Jharkhand
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