चतरा: बीमार खुशलाल की जिंदगी में अब आएगी खुशहाली
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अजीत कुमार सिन्हा/ पीके सिंह
चतरा: पिछले दिनों प्रकाशित एक खबर के आलोक में जिला से लेकर प्रखंड प्रशासन हरकत में आ गई। चतरा उपायुक्त जितेंद्र कुमार सिंह के निर्देश पर गुरूवार को कान्हाचट्टी बीडीओ ने बीमार खुशलाल को बेहतर इलाज के लिए उसके गांव से उठाकर पहले प्रखंड कार्यालय लाया। यहां इसकी प्रारंभिक जांच हुई व फिर उसे बेहतर इलाज के लिए 108 एम्बूलेंस की मदद से चतरा सदर अस्पताल भेज दिया गया। शुक्रवार को खुशलाल को सरकारी खर्चे पर इलाज के लिए रांची के रिम्स भेजा जाएगा। बताते चलें कि खुशलाल सिंह भोक्ता मूल रूप से कान्हाचट्टी प्रखंड के अति उग्रवाद प्रभावित पंचायत बेंगोकला के अमकुदर गांव का रहने वाला है। खुशलाल अपनी जिंदगी जीने की तमन्ना ही छोड़ चुका था, लेकिन एक प्रकाशित खबर के बाद प्रशासन न सिर्फ जागा, बल्कि खुशहाल के इलाज का सारा जिम्मा उठा लिया।
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https://samridhjharkhand.com/jharkhand-chitrangada-samiti-forum-honored-mpsबता दें की कान्हाचट्टी प्रखंड का वह सुदूरवर्ती घोर नक्सल प्रभावित अमकुदर गांव जहां पुलिस प्रशासन रात तो रात दिन के उजाले में भी जाने से कतराती है। अमकुदर गांव को वर्ष 1996 में माले नरसंहार के नाम से जाना जाता है। इसी अमकुदर गांव के बफन सिंह भोक्ता के 34 वर्षीय पुत्र खुशलाल सिंह भोक्ता है। खुशलाल पिछले आठ वर्षो से बीमार है। दरअसल खुशलाल अपना घर बनाने के क्रम में लकड़ी के सीढ़ी से गिर गया था। जिससे उसकी कमर की हड्डी टूट गई थी। खुशलाल ने अपनी क्षमतानुसार पहले सदर चतरा में इलाज करवाया, उसके बाद खुशलाल की हालत नाजुक देख चिकित्सकों ने रिम्स रेफर कर दिया था। परंतु खुशलाल के अनुसार उसका सही ईलाज रिम्स अस्पताल में नहीं हुआ, उल्टा रिम्स में वह कई अन्य बीमारियों की चपेट में आ गया। थक- हारकर खुशलाल रिम्स ये सोचकर घर आ गया, कि रिम्स में मरने से अच्छा घर पर मरना है। घर वापस लौटने के बाद वर्षों तक उसका सुध लेने कोई अधिकारी या जनप्रतिनिधि नहीं पहुंचे। जब एक खबर प्रकाशित हुई तो फिर प्रशासन हरकत में आया।
खुशलाल सिंह भोक्ता जब छत से गिर गया और पैसे के अभाव में ठीक से इलाज जब नहीं करवा सका, तो कुछ दिन के बाद अपने पति की दयनीय स्थिति देख दो वर्ष पूर्व पत्नी की हार्ट अटैक से मौत गई। खुशलाल ने बताया की पत्नी ने भी हमारे इलाज के लिए कई बार मुखिया से लेकर जिला तक गई, लेकिन हमारा इलाज कहीं से कोई नहीं करा सका तो पत्नी शोक में आकर इस दुनिया से चल बसी। खुशलाल का पहले आधार कार्ड नहीं बना था। नहीं बनने का मुख्य कारण था, खुशलाल का प्रखंड कार्यालय तक नहीं पहुंचना। चूंकि खुशलाल कमर में हुई बीमारी के कारण चलने- फिरने मे असमर्थ था। लेकिन प्रखंड विकास पदाधिकारी पप्पू रजक एवं बुल्लू केशरी गुरुवार की सुबह मोटरसाईकल के सहारे खुशलाल को दुर्गम जंगल एवं पहाड़ियों से घिरे अमकुदर गांव से निकालकर प्रखंड कार्यालय लाकर पहले उसका आधार कार्ड बनाया, फिर सदर अस्पताल चतरा भेजा।

खुशलाल का अब आधार कार्ड बन गया है तो उसी को आधार मान कर उसका आयुष्मान कार्ड भी एक सप्ताह के अंदर बन कर खुशलाल को मिलेगा, ताकि खुशलाल अपने मन मुताबिक अस्पताल में समुचित इलाज करा सके। खुशलाल का गुरुवार को गोल्डन कार्ड सदर अस्पताल में बना दिया गया। सिविल सर्जन सत्येन्द्र प्रसाद सिंह ने बताया कि खुशलाल का गोल्डन कार्ड बनकर तैयार हो गया है। खुशलाल को रिम्स भेजकर प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत के तहत इलाज करवाया जाएगा। खुशलाल की बूढी मां मनवां देवी को भी पेंशन नहीं मिलता था। डीसी के निर्देश पर प्रखंड विकास पदाधिकारी ने तत्परता दिखाते हुए उसकी मां का पेंशन की फार्म भी भरवा दिया है। जल्द ही अनुमंडलसे स्वीकृति मिलते ही खुशलाल की मां को पेंशन मिलना चालू हो जाएगा। बीडीओ पप्पू रजक ने बताया कि पहले की तरह खुशलाल की जिंदगी में खुशहाली आए इसके लिए प्रशासन उसके साथ पूरी तरह से खड़ी है। खुशलाल की मां का पेंशन मिलना जल्द प्रारंभ हो जाएगा साथ ही खुशलाल के पिता के नाम से आवास था जिसको शीघ्र ढलाई करा दिया जाएगा। तमाम कार्रवाई से संतुष्ट होकर खुषलाल व उसकी मां खुश हैं व डीसी व बीडीओ को इस कार्य के लिए धन्यवाद दिया।
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Edited By: Samridh Jharkhand
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