ईस्टर्न इंडिया के ग्रेनाइट अपलैंड्स में ‘थर्मल रिफ्यूजिया’ की खोज
2024–25 के ग्रीष्मकालीन डेटा से मिले अहम संकेत
पूर्वी भारत के ग्रेनाइट अपलैंड्स में किए गए नए फ़ील्ड अध्ययन से पता चला है कि ये पथरीले क्षेत्र गर्मी के दौरान प्राकृतिक थर्मल रिफ्यूजिया का निर्माण करते हैं। झारखंड के संथाल परगना में हुए सर्वेक्षण में पाया गया कि दरारें, झाड़ियाँ और चट्टानी संरचनाएँ तापमान को कम कर जीवों को सुरक्षित माइक्रोहैबिटैट प्रदान करती हैं।
पूर्वी भारत के पथरीले, ऊँचाई वाले क्षेत्रों में किए गए एक नए फ़ील्ड अध्ययन से पता चला है कि ग्रेनाइट अपलैंड्स गर्मी के तीखे दौर में प्राकृतिक ‘थर्मल रिफ्यूजिया’—यानी ठंडे, संरक्षित माइक्रोहैबिटैट—बनाते हैं। ये अवलोकन झारखंड के संथाल परगना में किए गए विस्तृत सर्वेक्षणों के दौरान सामने आए, जहाँ कई वन्य प्रजातियाँ अब अपने आवास में तापीय तनाव का सामना कर रही हैं।
अध्ययन के अनुसार, इन पथरीली अपलैंड्स में मौजूद दरारें, छायादार किनारे, घनी झाड़ियाँ और उभरी हुई चट्टानी संरचनाएँ दिन के सबसे गर्म समय में तापमान को कम कर देती हैं। यह सूक्ष्म ताप-अंतर जीवों को जीवित रहने के लिए सुरक्षित स्थान प्रदान करता है। इसे पारिस्थितिकी विज्ञान में ‘थर्मल बफरिंग’ कहा जाता है।

