गंगा और डॉल्फिन संरक्षण पर NGT में सुनवाई, अरशद नसर को मिला एक माह का समय
14 महीने बाद जेल से निकले अरशद नसर, NGT सुनवाई में हुए शामिल
साहिबगंज से गुजरने वाली गंगा नदी और डॉल्फिन संरक्षण को लेकर NGT, कोलकाता में अहम सुनवाई हुई। सामाजिक कार्यकर्ता सैयद अरशद नसर द्वारा दायर याचिका पर ट्रिब्यूनल ने विभिन्न विभागों के जवाबों पर प्रतिउत्तर दाखिल करने के लिए एक माह का समय दिया।
साहिबगंज: साहिबगंज जिले से गुजरने वाली गंगा नदी, जलीय जीव-जंतु और संरक्षित डाल्फिन के संरक्षण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, ईस्टर्न जोन, कोलकाता में बुधवार को अहम सुनवाई हुई। चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता सह पर्यावरण प्रेमी सैयद अरशद नसर द्वारा दायर याचिका संख्या-162/23 पर जस्टिस अरुण कुमार त्यागी और एक्सपर्ट मेंबर ईश्वर सिंह की पीठ ने सुनवाई की।
क्या है मामला?
याचिकाकर्ता अरशद नसर ने अपनी याचिका में गंगा नदी और डाल्फिन के संरक्षण के साथ-साथ गंगा नदी के किनारे और नदी मार्ग से स्टोन बोल्डर, चिप्स, मेटल के अवैध परिवहन व भंडारण पर रोक लगाने की मांग की है। याचिका में गंगा को प्रदूषण से बचाने के लिए ठोस कदम उठाने की भी अपील की गई है।
14 महीने बाद सुनवाई में पहुंचे अरशद

इस मामले में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, नई दिल्ली के निदेशक, झारखंड के खान सचिव व खान निदेशक, झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव, साहिबगंज के डीसी, डीएमओ और डीटीओ ने अपना काउंटर एफिडेविट और स्थलीय जांच रिपोर्ट दाखिल की। इसके अलावा गंगा नदी से स्टोन बोल्डर की आपूर्ति करने वाली जी.के. एंटरप्राइजेज कंपनी, मालदा, पश्चिम बंगाल और मां तारा एंटरप्राइजेज कंस्ट्रक्शन कंपनी, मुजफ्फरपुर, बिहार ने भी अपना पक्ष रखा।

याचिकाकर्ता को मिला एक माह का समय
एनजीटी ने दाखिल जवाबों पर प्रतिउत्तर दाखिल करने के लिए याचिकाकर्ता अरशद नसर की अधिवक्ता पुषाली बनर्जी को आदेश दिया। अधिवक्ता ने समय की मांग की, जिसे स्वीकार करते हुए ट्रिब्यूनल ने एक माह का समय दे दिया।
प्रशासन ने ली राहत की सांस
बुधवार को हुई सुनवाई में एनजीटी द्वारा कोई प्रतिकूल आदेश पारित नहीं किए जाने से पत्थर कारोबारियों से लेकर पुलिस और प्रशासनिक पदाधिकारियों ने राहत की सांस ली है। अब सभी की निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं। गौरतलब है कि साहिबगंज में गंगा नदी के रास्ते बड़े पैमाने पर स्टोन चिप्स और बोल्डर का परिवहन होता है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इससे गंगा का इको-सिस्टम और डाल्फिन का प्राकृतिक आवास खतरे में पड़ रहा है।
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.
