10,000 करोड़ ट्रेजरी घोटाले को दबा रही सरकार: प्रतुल शाहदेव
‘मदर ऑफ ऑल स्कैम’ पर BJP का हमला
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने झारखंड सरकार पर 10,000 करोड़ रुपये के कथित ट्रेजरी घोटाले को दबाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि SIT गठन में ऐसे अधिकारियों को शामिल किया गया है, जिन पर खुद जांच के सवाल हैं। साथ ही बड़े अफसरों पर कार्रवाई नहीं होने और बोकारो स्ट्रांग रूम में जमा सोने की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
रांची: भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने राज्य सरकार पर 10000 करोड़ के ट्रेजरी स्कैम को सुनियोजित तरीके से दफनाने का आरोप लगाया। प्रतुल ने कहा कि राज्य सरकार ने वित्त विभाग के निर्णय के आलोक में पत्रांक (2)-12/26, 252 के जरिए वित्तीय कार्य से जुड़े 3 वर्ष से ज्यादा एक ही पद पर जमे सिर्फ क्लर्क और किरानी के ट्रांसफर का आदेश दिया। एसपी, डीएसपी और ट्रेजरी अफसर यथावत पदों पर आज भी बने हुए हैं। असली आरोप तो इन पर ही लगा था, जो आज भी जमे हुए हैं।
प्रतुल ने कहा कि उत्पाद सचिव के नेतृत्व में बनी एसआईटी की टीम ने 2020 से रिकॉर्ड मांगा है। 8 मई को यह टीम बोकारो जाने वाली है। एजी की आपत्ति के बाद अब ये 2011 से रिकॉर्ड मांग रही है। इस घोटाले को दबा देने की पूरी प्लानिंग है। तभी जांच समिति में सीआईडी के वर्तमान दो आईजी को छोड़कर पुलिस के मानवाधिकार आईजी को कमान दी गई है। इसके अतिरिक्त एसआईटी टीम के जो सदस्य हैं, उनमें से एक 2022 के दौरान बोकारो के एसपी थे और 2014-16 के दौरान हजारीबाग के डीएसपी थे। इस दौरान दोनों जिलों में भी ट्रेजरी घोटाला हुआ था।


प्रतुल ने कहा कि झारखंड वित्तीय नियमावली एवं ट्रेजरी कोड के नियम 305 के अनुसार डीडीओ को अपने अधीन पैसे के खर्च की उसी तरह चिंता करनी चाहिए, जैसे वह अपने घर के लिए खर्च कर रहे हों। प्रतुल ने कहा कि यह आश्चर्यजनक बात है कि एक माह बीत जाने के बाद भी डीडीओ और ट्रेजरी ऑफिसर अभी भी अपने पदों पर बने हुए हैं। एसआईटी को जांच के लिए इन्हीं अफसरों से मदद लेनी है। ये न सिर्फ सबूत मिटा सकते हैं, बल्कि जांच समिति को भी गुमराह कर सकते हैं।
पीएजी ने गंभीर अनियमितता पकड़ी थी
प्रतुल ने कहा कि इससे पहले प्रिंसिपल एजी की 2 अप्रैल, 2026 की रिपोर्ट में ही भौतिक सत्यापन के दौरान बड़े पैमाने पर ट्रेजरी में गड़बड़ी के सबूत पेश किए गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, 58% डीए को कई गुना ज्यादा बढ़ाकर लिया गया। रिपोर्ट में मास्टर डेटा कंट्रोल में बड़ी कमजोरी पाई गई। इसी रिपोर्ट में 2175 मामले ऐसे पाए गए, जिनकी जन्मतिथि 2023 और 2026 के बीच बदल दी गई। इसी कालखंड में 2890 पैन नंबर के साथ भी फेरबदल हुआ और 5037 सरकारी कर्मचारियों के जॉइनिंग डेट के साथ भी छेड़छाड़ की गई।
प्रतुल ने कहा कि सरकार का जो रवैया है, उससे स्पष्ट है कि ‘मदर ऑफ ऑल स्कैम’ को दबाने की कोशिश हो रही है। इसलिए राज्य सरकार को अविलंब इस पूरे मामले की ईडी और सीबीआई जांच के आदेश देने चाहिए। अगर राज्य सरकार ऐसा नहीं करती है, तो भारतीय जनता पार्टी भविष्य में उचित कदम उठाएगी।
आज की प्रेस वार्ता में प्रदेश सह मीडिया प्रभारी अशोक बड़ाइक भी उपस्थित थे।
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.
