सुदिव्य कुमार सोनू का राजनीतिक सफर: झारखंड आंदोलन से मंत्री पद तक की यात्रा
झारखंड आंदोलन के दौरान एक दर्जन से अधिक मुकदमों का किया सामना
सुदिव्य कुमार सोनू ने वर्ष 1989 में झारखंड मुक्ति मोर्चा से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। झारखंड आंदोलन में दिशोम गुरु शिबू सोरेन के साथ सक्रिय रहे और संगठन के कई महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 2019 में पहली बार गिरिडीह के विधायक बने और 2024 में दूसरी बार विधानसभा पहुंचे।
गिरिडीह: झारखंड मुक्ति मोर्चा से वर्ष 1989 में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले सुदिव्य कुमार सोनू का राजनीतिक सफर लंबे संघर्ष और संगठनात्मक जिम्मेदारियों से जुड़ा रहा है। दिशोम गुरु शिबू सोरेन के साथ झारखंड आंदोलन में शामिल रहे सुदिव्य कुमार सोनू पर आंदोलन के दौरान एक दर्जन से अधिक मुकदमे भी दर्ज हुए।
राजनीतिक जीवन में उन्होंने संगठन के विभिन्न पदों पर जिम्मेदारियां संभालीं। वर्ष 1990 में वे नगर अध्यक्ष बने, जबकि वर्ष 2003 में उन्हें जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली। इसके बाद वर्ष 2006 में वे गिरिडीह जिला बीस सूत्री उपाध्यक्ष बने।गिरिडीह में विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, नए स्वरूप में महिला महाविद्यालय, चिड़ियाघर, बायोडायवर्सिटी पार्क, लाइब्रेरी, जेसी बोस सीएम एक्सीलेंस स्कूल, पचम्बा सीएम एक्सीलेंस स्कूल और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, गिरिडीह में सीएम एक्सीलेंस स्कूल सहित कई योजनाओं को धरातल पर उतारने में उनका योगदान बताया गया।
इसके अलावा 50 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता वाली मेधा डेयरी परियोजना, फोरलेन निर्माण, बायपास सड़क की स्वीकृति, पीरटांड़ में मेगा लिफ्ट सिंचाई परियोजना और झारखंड के पहले सोलर सिटी के रूप में गिरिडीह की पहचान भी विकास योजनाओं में शामिल रही।
उसरी नदी के किनारे शास्त्री नगर से अरगाघाट तक मरीन ड्राइव, खंडोली और वाटरफॉल के सौंदर्यीकरण सहित कई जनहित की योजनाओं को आगे बढ़ाया गया। उनके समर्थकों का मानना है कि गिरिडीह और झारखंड के विकास में उनके योगदान को लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
सुदिव्य कुमार सोनू के समर्थकों का कहना है कि उनके जैसा नेता सदियों में जन्म लेता है।
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.
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