Ranchi News: BIT मेसरा में ग्रीन बिल्डिंग और एनर्जी सिमुलेशन पर पांच दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न
मुख्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर किया उद्घाटन
बीआईटी मेसरा के वास्तुकला एवं योजना विभाग में आयोजित पाँच दिवसीय 'ग्रीन बिल्डिंग डिज़ाइन विथ एनर्जी सिमुलेशन फॉर ईसीएसबीसी कंप्लायंस' वर्कशॉप का समापन हो गया। इस दौरान देश भर के ख्यातिप्राप्त वास्तुविदों ने नेट ज़ीरो, क्लाइमेट स्टूडियो सॉफ्टवेयर और सस्टेनेबल आर्किटेक्चर पर गहन व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया।
रांची: बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान, मेसरा के वास्तुकला एवं योजना विभाग द्वारा आयोजित पाँच दिवसीय 'ग्रीन बिल्डिंग डिज़ाइन विथ एनर्जी सिमुलेशन फॉर ईसीएसबीसी कंप्लायंस' वर्कशॉप के पहले दिन की शुरुआत 1 सितंबर को सुबह 9:30 बजे कैट हॉल में हुई। आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर के पूर्व उपाध्यक्ष गजानंद राम, ईडीएफ, नई दिल्ली के निदेशक वास्तुविद् तन्मय तथागत तथा विभागाध्यक्ष डॉ. सत्याकी सरकार उपस्थित रहे।
आयोजन की शुरुआत मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं संस्थान प्रार्थना के साथ की गई। इस अवसर पर आयोजन के संयोजक वास्तुविद आशुतोष कुमार एवं आयोजन के समन्वयक डॉ. राजन चंद्र सिन्हा उपस्थित रहे। इसके बाद एसटीटीपी के संयोजक और वास्तुकला एवं योजना विभाग के सहायक प्रोफेसर वास्तुविद आशुतोष कुमार द्वारा सभी उपस्थित लोगों का स्वागत किया गया। पहला सत्र एनवायरमेंटल डिजाइन सॉल्यूशंस, नई दिल्ली के डायरेक्टर, वास्तुविद तन्मय तथागत ने प्रस्तुत किया, जिसमें 'डीकार्बोनाइजेशन - नेट ज़ीरो का रास्ता' के विषय पर ध्यान केंद्रित किया गया।कार्यक्रम की शुरुआत ऊर्जा दक्षता एवं सतत भवन डिजाइन के क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ श्री पी.सी. थॉमस के नेतृत्व में आयोजित एक ऑनलाइन सत्र से हुई। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने ऊर्जा संरक्षण, ऊर्जा दक्षता तथा पर्यावरण के अनुकूल भवन निर्माण के महत्व पर प्रकाश डाला। इसके पश्चात एक संक्षिप्त चाय अवकाश के बाद राणा प्रताप पोद्दार, अग्निक्रीड़ा के मैनेजिंग पार्टनर,के प्रतिनिधि एवं बीईई -प्रमाणित इसीबीसी मास्टर ट्रेनर, तथा आर्किटेक्ट जितेंद्र कुमार व्यास के मार्गदर्शन में एक व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। दोपहर के लंच के अवकाश के बाद व्यावहारिक सत्र पुनः प्रारंभ हुआ।
इसके पश्चात् ‘ऊर्जा दक्ष लैंडस्केप डिज़ाइन’ विषय पर एक महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किया गया, जिसका संचालन लैंडस्केप आर्किटेक्ट एवं इंटीरियर डिज़ाइनर तथा एनआईटी पटना की सहायक प्रोफेसर डॉ. अनुष्री बर्मन द्वारा किया गया। सत्र में ऊर्जा दक्षता को ध्यान में रखते हुए लैंडस्केप डिज़ाइन की विभिन्न अवधारणाओं एवं व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा की गई। इसी के साथ कार्यक्रम का समापन शाम 5:30 बजे हुआ | ऊर्जा सिमुलेशन के साथ ग्रीन हाउस डिज़ाइन (ईसीएसबीसी अनुपालन हेतु) कार्यशाला के तीसरे दिन का शुभारंभ 3 सितंबर 2026 को प्रातः 9:30 बजे हुआ।
इस कार्यक्रम की शुरुआत एनआईटी पटना की सहायक प्राध्यापक एवं लैंडस्केप आर्किटेक्ट डॉ. अनुश्री बर्मन के एक प्रभावशाली सत्र से हुई, जिसमें लैंडस्केप डिज़ाइन, सतत पर्यावरण, तथा प्राकृतिक एवं निर्मित स्थलों के समन्वय पर विशेष एवं ज्यादा बल दिया गया। इसके बाद राणा प्रताप पोद्दार एवं आर्किटेक्ट जितेंद्र कुमार व्यास द्वारा एक व्यावहारिक सत्र आयोजित किया गया। इसके बाद लंच ब्रेक हुआ, जिसके उपरांत व्यावहारिक सत्र पुनः आरंभ हुआ। कार्यशाला के तीसरे दिन का समापन शाम 5:30 में हुआ।
ई.सी.एस.बी.सी. अनुपालन पर आधारित ग्रीन बिल्डिंग डिज़ाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम के चौथे दिन की शुरुआत 4 सितंबर 2026 को प्रातः 9:30 बजे हुई। कार्यक्रम की शुरुआत क्लाइमेट स्टूडियो सॉफ्टवेयर पर एक गहन प्रशिक्षण सत्र से हुई, जिसका संचालन वास्तुविद् जयेश सिंह रावत और प्रतीक्षा परड ने किया। इसके पश्चात एक संक्षिप्त चाय अवकाश हुआ, जिसके बाद व्यावहारिक सॉफ्टवेयर प्रशिक्षण का क्रम जारी रहा, जिसमें प्रतिभागियों ने पर्यावरणीय आंकड़ों को अपने वास्तुशिल्प डिज़ाइन में लागू करना सीखा। दोपहर 2:00 बजे भोजन अवकाश रखा गया, जिसके बाद सॉफ्टवेयर प्रशिक्षण सत्र पुनः आरंभ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों को भवन की ऊर्जा दक्षता का मूल्यांकन और अनुकूलन करने में सहायता प्रदान की गई।
डिजिटल शिक्षण से परिपूर्ण यह अत्यंत उपयोगी दिन कार्यशाला के चौथे दिन के रूप में सायं 5:30 बजे संपन्न हुआ। एसटीटीपी के पांचवें दिन का आरंभ प्रातः 9:30 बजे डॉ. सुशील कुमार सोलंकी के व्याख्यान सत्र से हुआ। सस्टेनेबल बिल्डिंग डिज़ाइन और एनर्जी-एफिशिएंट वास्तुकला में उनकी विशेषज्ञता ने दिन भर के सत्रों के लिए एक अत्यंत ज्ञानवर्धक और आकर्षक नींव रखी। इसके पश्चात् डॉ. मीनू अग्रवाल का ऑनलाइन सत्र आयोजित हुआ, जिसमें उन्होंने पर्यावरणीय डिज़ाइन और हरित भवन निर्माण की अपनी विशेषज्ञता एवं ज्ञान को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
इसके बाद, सीएमपीडीआईएल, रांची के सेवानिवृत्त मुख्य वास्तुकार, आर्किटेक्ट सुदीप्त चक्रवर्ती ने एक व्याख्यान प्रस्तुत किया। इस सत्र में उन्होंने बड़े पैमाने के संस्थागत और औद्योगिक आर्किटेक्चरल डिज़ाइन में अपने व्यापक अनुभव को साझा किया। इसके बाद, नलिन गोयल एंड एसोसिएट्स के प्रधान वास्तुकार और सीआईआई आईजीबीसी मान्यता प्राप्त पेशेवर, आर्किटेक्ट नलिन गोयल का व्याख्यान हुआ, जिसमें उन्होंने सस्टेनेबल आर्किटेक्चर और नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) पर अपने विचार साझा किए। इसके तुरंत बाद समापन सत्र का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में नई दिल्ली स्थित एनवायरनमेंटल डिज़ाइन सॉल्यूशंस के निदेशक आर्किटेक्ट तन्मय तथागत तथा बेंगलुरु स्थित मानसाराम आर्किटेक्ट्स की संस्थापक एवं प्रधान आर्किटेक्ट नीलम मंजूनाथ ने मुख्य वक्ताओं के रूप में अपने विचार साझा किए। दिन का समापन दोपहर 3:30 बजे एक साइट विजिट के साथ हुआ, जिससे प्रतिभागियों को वास्तविक माहौल में सस्टेनेबल आर्किटेक्चरल प्रैक्टिसेस (टिकाऊ वास्तुकला के तरीकों) को प्रत्यक्ष रूप से देखने और समझने का मौका मिला |
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