Koderma News: मॉडर्न पब्लिक स्कूल में बाल सुरक्षा और पॉक्सो एक्ट पर कार्यशाला आयोजित
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की डिजिटल पहल की चर्चा
कोडरमा के मॉडर्न पब्लिक स्कूल में प्राचार्य गुरु चरण वर्मा की अध्यक्षता में शिक्षकों के लिए पॉक्सो एक्ट पर एक दिवसीय कार्यशाला हुई। इसमें बाल यौन शोषण के लक्षणों की पहचान करने, कड़े कानूनी दंड, काउंसलिंग तकनीकों और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के 'पॉक्सो ई-बॉक्स' के उपयोग पर विस्तृत विमर्श किया गया।
कोडरमा: मॉडर्न पब्लिक स्कूल में शिक्षकों के लिए 'पॉक्सो (POCSO) एक्ट और बाल सुरक्षा' पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के मुख्य वक्ता विद्यालय के प्राचार्य गुरु चरण वर्मा थे, जिन्होंने शिक्षकों का ज्ञानवर्धन करते हुए पॉक्सो कानून की बारीकियों, इसके तहत मिलने वाले कड़े दंड और पीड़ित बच्चों की काउंसिलिंग के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए प्राचार्य गुरु चरण वर्मा ने बताया कि POCSO का पूरा नाम प्रिवेंशन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस (Prevention of Children from Sexual Offences Act) है। यह कानून लड़कियों के साथ-साथ लड़कों (सभी बच्चों) को समान रूप से सुरक्षा प्रदान करता है। उन्होंने इसके तहत मिलने वाले कड़े कानूनी दंड की जानकारी देते हुए बताया की


बच्चे डर के कारण खुद आगे आकर नहीं बोलते। शिक्षकों को उन्हें सुरक्षित और सहज महसूस कराकर बात करनी चाहिए। बच्चों को यह विश्वास दिलाना जरूरी है कि इसमें उनकी कोई गलती नहीं है डरना और शर्मिंदा होना उस अपराधी को चाहिए जिसने गलत किया है। अगर हम चुप रहेंगे, तो अपराधी की हिम्मत और बढ़ेगी।
वर्मा ने यह भी जानकारी दी कि यदि कोई बच्चा सीधे बोलने से डरता है, तो राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा जारी POCSO e-Box* का उपयोग किया जा सकता है । जहाँ बच्चे डिजिटल माध्यम या तस्वीरों की मदद से भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
कार्यशाला में एक व्यावहारिक गतिविधि (फन एक्टिविटी) के माध्यम से यह समझाया गया कि कोई भी समस्या अपने आप में बड़ी नहीं होती, बल्कि 'समाज और परिवार क्या सोचेगा' इस डर से हम उसे बड़ा बना देते हैं। यही डर दोषियों का हौसला बढ़ाता है। माता-पिता के बाद शिक्षक ही बच्चों के सबसे बड़े संरक्षक (गार्जियन) हैं, इसलिए बच्चों को हर संकट से बचाना एक आदर्श शिक्षक का धर्म है।
विद्यालय की संगीता शर्मा ने इस कार्यशाला की सराहना करते हुए कहा:
"बाल यौन शोषण आज के समय में एक अत्यंत गंभीर चिंता का विषय है। यदि शिक्षक बच्चों के साथ एक दोस्त और अभिभावक की तरह पेश आएंगे, तो बच्चे अपनी हर परेशानी साझा कर सकेंगे। इसके बाद शिक्षक, माता-पिता के साथ बेहतर सामंजस्य बिठाकर किसी भी समस्या का सही समाधान निकाल सकते हैं।" इस कार्यशाला में विद्यालय के सभी शिक्षक और शिक्षिकाएं उपस्थित थे, जिन्होंने बाल सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्ध
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