दुनिया की तेल लाइफलाइन पर खतरा, होर्मुज में अमेरिका क्यों उतार रहा रोबोट और ड्रोन?
मध्य-पूर्व के अहम समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिका ने रोबोट और अंडरवॉटर ड्रोन तैनात कर समुद्र की स्कैनिंग शुरू कर दी है। इन हाई-टेक सिस्टम की मदद से समुद्र में छिपी बारूदी सुरंगों की पहचान की जा रही है, ताकि अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही सुरक्षित बनी रहे और वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित न हो।
नैशनल डेस्क: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आधुनिक रोबोटिक सिस्टम और अंडरवॉटर ड्रोन तैनात कर दिए हैं। इन तकनीकों का इस्तेमाल समुद्र के भीतर छिपी बारूदी सुरंगों (Sea Mines) को ढूंढने और निष्क्रिय करने के लिए किया जा रहा है, ताकि अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही सुरक्षित बनी रह सके।
दरअसल, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वह संकरा समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया के लगभग एक-पांचवां (20%) तेल और गैस का व्यापार गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की बाधा वैश्विक ऊर्जा सप्लाई और अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि अमेरिका इस इलाके को सुरक्षित रखने के लिए हाई-टेक तकनीकों का सहारा ले रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य समुद्री व्यापार को फिर से सामान्य करना और वैश्विक ऊर्जा सप्लाई को सुरक्षित रखना है। हाल के महीनों में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस क्षेत्र में बारूदी सुरंगों का खतरा बढ़ गया है, जिससे कई जहाजों को रास्ता बदलना पड़ा या यात्रा रोकनी पड़ी।
इतिहास में भी ऐसा पहले हो चुका है। वर्ष 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान अमेरिका ने इसी तरह जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए समुद्र में ऑपरेशन चलाया था। हालांकि उस समय तकनीक इतनी उन्नत नहीं थी, लेकिन अब रोबोटिक सिस्टम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने समुद्री सुरक्षा के तरीके पूरी तरह बदल दिए हैं।
वर्तमान समय में यह ऑपरेशन केवल सैन्य रणनीति का हिस्सा नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लंबे समय तक असुरक्षित रहता है, तो तेल की कीमतों में तेजी, व्यापार में बाधा और कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसलिए अमेरिका सहित कई देश इस समुद्री मार्ग को सुरक्षित बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी और तकनीकी उपाय कर रहे हैं।
