होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली इंटरनेट केबलों पर ईरान की नजर, बढ़ सकती है दुनिया की टेंशन

होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली इंटरनेट केबलों पर ईरान की नजर, बढ़ सकती है दुनिया की टेंशन

होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक चर्चा में है, लेकिन इस बार मुद्दा तेल नहीं बल्कि इंटरनेट केबल हैं। IRGC समर्थित ईरानी मीडिया संस्थान सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि समुद्री इंटरनेट केबलों से गुजरने वाली वैश्विक टेक कंपनियों से शुल्क वसूला जाए। प्रस्तावित योजना के तहत Meta, Google जैसी कंपनियों पर ट्रांजिट टैक्स लगाया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना लागू हुई तो इंटरनेट सेवाओं की लागत बढ़ सकती है और वैश्विक डिजिटल कनेक्टिविटी पर बड़ा असर पड़ सकता है।

Hormuz Strait Internet Cables: होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक चर्चा के केंद्र में है, लेकिन इस बार मामला तेल का नहीं, बल्कि इंटरनेट का है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से संबद्ध ईरानी मीडिया संस्थान अपनी सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि वह इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने वाली समुद्री केबलों के जरिए राजस्व अर्जित करे। यदि यह योजना साकार हुई तो मेटा, गूगल जैसी वैश्विक टेक कंपनियों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा और दुनिया भर के इंटरनेट उपयोगकर्ता भी इससे अछूते नहीं रहेंगे।

समुद्री केबल: इंटरनेट की जीवनरेखा

दुनिया का 99 फीसदी से अधिक अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट ट्रैफिक समुद्र की गहराइयों में बिछी केबलों से होकर गुजरता है। होर्मुज जलडमरूमध्य इन्हीं केबलों का एक अहम मार्ग है। ईरानी अधिकारी इस जलमार्ग को एक ऐसे अदृश्य हाईवे के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं जिसके जरिए रोजाना 10 ट्रिलियन डॉलर से अधिक के वित्तीय लेन-देन संपन्न होते हैं। अब IRGC इसी निर्भरता को अपनी कमाई का जरिया बनाना चाहता है।

तीन चरणों में वसूली की योजना

तस्नीम और फार्स जैसे IRGC समर्थक मीडिया संस्थानों ने एक त्रिस्तरीय रणनीति का खाका खींचा है। इस योजना के तहत जलडमरूमध्य से केबल गुजारने के बदले विदेशी टेक कंपनियों से पहले एकमुश्त शुल्क और फिर सालाना ट्रांजिट टैक्स वसूला जाएगा। इसके अलावा प्रत्येक जहाज से 20 लाख डॉलर तक की फीस लेने और केबल काटने की धमकी देने की बात भी सामने आई है।

वैश्विक इंटरनेट पर संभावित असर

अगर ईरान यह कदम उठाता है तो इसके परिणाम केवल कुछ कंपनियों तक सीमित नहीं रहेंगे। टेक दिग्गजों पर बढ़ा बोझ अंततः आम उपयोगकर्ताओं तक पहुंचेगा और इंटरनेट सेवाओं की लागत बढ़ सकती है। साथ ही, वैश्विक डिजिटल कनेक्टिविटी पर भू-राजनीतिक दबाव का एक नया और खतरनाक दौर शुरू हो सकता है।

Edited By: Samridh Desk
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