कौन हैं IAS पद्मा जायसवाल? 2003 बैच की अधिकारी को केंद्र सरकार ने क्यों किया बर्खास्त

कौन हैं IAS पद्मा जायसवाल? 2003 बैच की अधिकारी को केंद्र सरकार ने क्यों किया बर्खास्त
पद्मा जायसवाल मामले में केंद्र सरकार की बड़ी कार्रवाई (ग्राफिक्स: समृद्ध झारखंड)

IAS Officer Padma Jaiswal Profile: देश की नौकरशाही में एक बड़ी और चौंकाने वाली कार्रवाई सामने आई है। केंद्र सरकार ने AGMUT कैडर की वरिष्ठ IAS अधिकारी पद्मा जायसवाल को भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के चलते सेवा से बर्खास्त कर दिया है। आइए जानते हैं कौन हैं पद्मा जायसवाल और क्या है पूरा मामला।

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए वर्ष 2003 बैच की AGMUT कैडर की IAS अधिकारी पद्मा जायसवाल को उनके पद से हटा दिया है। बर्खास्तगी से पहले वे दिल्ली सरकार के प्रशासनिक सुधार विभाग में विशेष सचिव के रूप में कार्यरत थीं। उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप थे, जिसके आधार पर यह कदम उठाया गया। सूत्रों के अनुसार, यह आदेश राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की अनुशंसा पर जारी किया गया यही विभाग AGMUT कैडर के अधिकारियों के सेवा संबंधी मामलों का संचालन करता है।


क्या हैं आरोप और कब से चल रहा है मामला?

यह मामला डेढ़ दशक से भी पुराना है। साल 2007 में पद्मा जायसवाल अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग जिले में उपायुक्त (Deputy Commissioner) के पद पर तैनात थीं। फरवरी 2008 में स्थानीय निवासियों ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, जिसमें सरकारी राजस्व के गबन और अपने आधिकारिक पद के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए। शिकायत की प्रारंभिक जांच के बाद अप्रैल 2008 में उन्हें निलंबित कर दिया गया था।


केंद्र सरकार ने कैसे की कार्रवाई?

गृह मंत्रालय (MHA) ने इस मामले में अखिल भारतीय सेवाएं (अनुशासन और अपील) नियम, 1969 के नियम 8 के अंतर्गत विभागीय जांच की प्रक्रिया शुरू की। अनुशासनात्मक प्राधिकारी ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) से परामर्श लिया, जिसने उन्हें सेवा से हटाने की सिफारिश की। इसके बाद राष्ट्रपति की अंतिम मंजूरी के बाद कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की सिफारिश पर बर्खास्तगी का आधिकारिक आदेश जारी किया गया।


पद्मा जायसवाल का क्या कहना है?

बर्खास्तगी के बाद जब पद्मा जायसवाल से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि यह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है, अब तक कोई दोष सिद्धि नहीं हुई है और उन्हें पूरी तरह बर्खास्त नहीं किया गया है। हालांकि सरकार का रुख इससे अलग है और आदेश जारी हो चुका है।


यह मामला क्यों है अहम?

AGMUT कैडर के अधिकारियों से जुड़े मामलों की निगरानी सीधे केंद्र सरकार करती है। किसी IAS अधिकारी को राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद सेवा से हटाना एक दुर्लभ और गंभीर कदम माना जाता है। यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी सेवा में अनुशासन की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण नजीर बन सकता है।

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Edited By: Samridh Media Desk
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