नागरिकता संशोधन बिल पर अमित शाह का जोरदार भाषण सुनिए, मनमोहन-आडवाणी की सबको दिलायी याद
नयी दिल्ली : गृहमंत्री अमित शाह ने आज लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल पेश किया. अमित शाह ने इस पर दर्ज करायी जा रही आपत्तियों पर कहा कि ऐसा कौन सा देश है जिसने नागरिकता संशोधन बिल नहीं लाया. अमित शाह ने यह भी बताया कि यह बिल क्यों लाया गया है. गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि अगर इस बाल को गलत साबित कर दिया जाएगा तो वे इसे वापस ले लेंगे. शाह ने कहा कि जिस तरह हमें अपने देश के अल्पसंख्यकों की चिंता है, उसी तरह पड़ोसी देशों से आने वाले अल्पसंख्यकों के लिए भी प्रतिबद्ध होना चाहिए.
Union Home Minister Shri @AmitShah on Citizenship Amendment Bill 2019 in Lok Sabha. https://t.co/btHxhNSCrG #CitizenshipAmendmentBill2019— BJP LIVE (@BJPLive) December 9, 2019
भारत की 106 किलोमीटर की जमीनी सीमा अफगानिस्तान से सटी हुई है। मैं रेकॉर्ड पर कह रहा हूं, उकसाने से कुछ नहीं होगा।
मैं इस देश के भूगोल को जानता हूं, मैं यहीं का हूंः गृह मंत्री श्री @AmitShah #CitizenshipAmendmentBill2019 pic.twitter.com/8eB22ERXZI
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ऐसा नहीं है कि पहली बार किसी सरकार ने नागरिकता पर निर्णय लिया है।1971 में श्रीमती इंदिरा गांधी ने निर्णय किया कि बांग्लादेश से आए हुए सभी लोगों को नागरिकता दी जाएगी। अब मुझे बताइए कि तो फिर पाकिस्तान से आए हुए नागरिक क्यों नहीं लिए?: श्री @AmitShah #CitizenshipAmendmentBill2019 pic.twitter.com/C7LxWXr1eP
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#CitizenshipAmendmentBill2019 धार्मिक रूप से प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का बिल है।
इस बिल ने किसी मुस्लिम के अधिकार नहीं लिए हैं।
हमारे एक्ट के अनुसार कोई भी आवेदन कर सकता है। नियमों के अनुसार आवेदन करने वालों को नागरिकता दी जाएगी: श्री @AmitShah pic.twitter.com/Jqmj9NX9Qt
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अमित शाह ने कहा कि अगर हम भारत के अल्पसंख्यकों की चिंता करते हैं तो क्या पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के पीड़ित अल्पसंख्यकों की चिंता नहीं करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति अपना देश क्या गांव भी यूं ही नहीं छोड़ता. वे इसके लिए कितने अपमानित हुए होंगे. उन्होंने कहा कि वे आवश्यक सुविधाओं से वंचित रहे और अपमानित हुए. उन्होंने कहा कि इतने सालों से यहां रहने वाले लोगों को न शिक्षा मिली, न रोजगार और न ही नागरिकता व कोई अन्य सुविधा.
अमित शाह ने कहा कि नागरिकता को लेकर इस तरह के कानून पहले भी बने हैं. उन्होंने कहा कि 1947 में लाखों लोगों ने भारत में शरण ली और इन्हीं में मनमोहन सिंह एवं लालकृष्ण आडवणी आए. उन्होंने कहा कि ये हमें शरणार्थियों से ही मिले जो देश के प्रधानमंत्री एवं उप प्रधानमंत्री बने.
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