करमा पर्व की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं: शिरोमणी राम महतो
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– करमा के गीतों में भाई- बहन का अटूट प्रेम
झारखंड का एक प्रमुख पर्व है-करमा ! यह भाई बहन का पर्व है । भाई-बहन का अटूट प्रेम प्रतिबिंबित होता है – करम पर्व में।
प्रकृति की मनोहारी छटा-छवि को निखारकर बहनों के मन में ससुराल से मायका आने की लालसा हिलोरे मारने लगती है। करम पर्व आते ही बहनें अपने भाई का रास्ता देखने लगती है –
फूटले कास फूटले कास
बहिन के लागल आस
मोर भइया अईते लेनिहार
ओकर खातिर राखबे खस्सी जोगाय
आरो राखबे छोटकी ननदी जोगाय
बहनें अपने मायका संदेश भी भेजवाती है और मां से करम पर्व के लिए तैयारियां भी करने को कहती हैं –
लेहि दिहे गो अम्मा लाल मोहर डलवा करमा लागि
भेजि दिहे गो पीठिक छोट भइवा करमा लागि ।
भाई अपनी बहनों को करमा – पर्व करने के लिए लिवा लाते हैं। तो बहनें करमा का जावा उठाने के लिए भाई से
डाला और चना लाने को कहती हैं। भाई भी बहन की मांग पूरी करने के लिए तत्पर रहता है –
भैया बसले नगरिया (स्थायीटेक)
कहां पैइबे गो भइया बूट अंकुर बूट अंकुर
बहिन गे दुकाने पईबे बूट अंकुर बूट अंकुर
बहने डाला में बालू,चना,जौकुलथी आदि डालकर जावा उठाती है और जब जावा उगने लगता है तो बहनें हुलस-हुलस कर गाती हैं –
दादा रे डलवा बुनाई देले ।
भइया रे डलवा उपजी गेलेइ ।
जावा उठाकर बहने सात दिनों तक अखरा में खुलकर नाचती – गाती है और जावा जगाती है। भाई भी बहनो की थिरकन के साथ ढोल-मांदर बांसुरी बजाकर ताल मिलाते हैं। तब भाई-बहन के नृत्य संगीत का अदभुत संगम देखने को मिलता है –
दुलारी बहिन करते करम राजा भइया बजइते मांदरिया
करमा पूजा की रात को नाच गान के साथ जागरण करना पडता है। जिसे भाई सहर्ष स्वीकार करते हैं –
अखरा जगाय दिहे गो दादा अखरा जगाय दिहे
करमा के राति अखरा जगाय दिहे
जगाई देबो गे बहिन अखरा जगाय देबो
ढोल-मांदर बजाइके अखरा जगाय देबो।
बहनें सात दिनों तक अपने भाई के शील-शाल और प्यार व्यवहार का गुणगान कर नाचते-गाते थकती नहीं है। भाद्र-शुक्ल पक्ष एकादशी (पदमा एकादशी) को वे दिनभर उपवास करती हैं। रात में अखरा में करमवृक्ष की डाल गाडकर पूजा करती हैं। इस पुनीत कार्य का श्रेय और धर्म बहनें स्वय नहीं लेती है बल्कि अपने भाई को समर्पित करती हैं। करमा देवता की पूजा के बाद व्रती (करमइती) सब एक दूसरे से पूछती हैं और उत्तर देती हैं –
प्रश्न: केकर करम—-?
उत्तर: आपन करम
प्रश्न: केकर धरम—-?
उत्तर: भईया का धरम।
तदुपरांत बहने थाल में दीया-बाती लेकर करम डाल के चारो ओर नाचती गाती हुई घूमती हैं और करम देवता से भाई भाई के लिए आर्शीर्वाद मांगती है –
दिहा दिहा करम गोसाई दिहा आसीस गो
मोर भइया जियते लाखो बरिस गो।
इस प्रकार भाई-बहन के अटूट संबंध व अदभुत प्रेम का अनूठा संगम है -यह झारखंड का लोक उत्सव !
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Edited By: Samridh Jharkhand
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