पूर्व मंत्री बंधु तिर्की गिरफ्तार, एसीबी की कार्रवाई
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रांची: राष्ट्रीय खेल घोटाले में अप्राथमिक अभियुक्त सह प्रदेश के पूर्व शिक्षा व खेल मंत्री बंधु तिर्की को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने बुधवार को गिरफ्तार कर लिया। गौरतलब हो कि गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट की शरण ली थी, लेकिन कोर्ट द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज किये जाने के बाद ही एसीबी ने उन्हें सिविल कोर्ट परिसर के पास से हिरासत में लिया है।
एक सप्ताह पहले जस्टिस एके चौधरी की अदालत में 34 वें राष्ट्रीय खेल घोटाला मामले में बंधु तिर्की की अग्रिम जमानत पर सुनवाई हुई थी, जिसमें तिर्की ने कहा था कि एसीबी को उनके खिलाफ इस मामले में कोई सबूत नहीं मिला इसलिए उन्हें जमानत मिलनी चाहिए। बावजूद इसके तिर्की की जनमात को कोर्ट ने खारिज कर दिया था। 34 वें राष्ट्रीय खेल घोटाले को लेकर झारखंड के पूर्व खेल मंत्री बंधु तिर्की, आयोजन समिति के कार्यकारी अध्यक्ष रहे आरके आनंद सहित पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा चलाने की सरकार ने एसीबी को अनुमति दी थी।
झारखंड में वर्ष 2007 में राष्ट्रीय खेल का आयोजन किया जाना था। मगर तैयारी पूरी नहीं होने की वजह से 34वें राष्ट्रीय खेल का आयोजन वर्ष 2011 में किया गया। इसके बाद खेल सामग्री की खरीदारी, ठेका देने में अनियमितता और निर्माण में गड़बड़ी के कई मामले सामने आये थे। इसमें करीब 29 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान सरकार को हुआ था। इसके बाद वर्ष 2010 में एसीबी ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी। राष्ट्रीय खेल घोटाला में यह तीसरी गिरफ्तारी है। इसके पहले एसएम हाशमी और पीसी मिश्रा को इसी मामले में गिरफ्तार किया गया था, इसके साथ ही टेंडर कमेटी के चार अन्य सदस्यों पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटकने लगी है।
पूर्व खेल मंत्री बंधु तिर्की पर धनबाद में दो स्क्वैश कोर्ट के निर्माण में वित्तीय अनियमितता बरतने के आरोप हैं। ज्ञात हो कि स्क्वैश कोर्ट के निर्माण की जिम्मेदारी मुंबई की कंपनी जाइरेक्स इंटरप्राइजेज को दी गयी थी। कंपनी ने 1,44,32,850 रुपये का एस्टीमेट दिया था। आयोजन समिति के महासचिव एसएम हाशमी और तत्कालीन खेल निदेशक तथा सचिव की अनुशंसा के बाद इस प्रस्ताव की फाइल तत्कालीन विभागीय मंत्री (खेल मंत्री) बंधु तिर्की के पास भेजी गयी थी। तिर्की ने नीतिगत निर्णय लेते हुए 20 अक्टूबर, 2008 को इसे अनुमोदित कर दिया। इसमें कंपनी को अग्रिम 50 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया, लेकिन बाद में बिना स्वीकृति के भुगतान के कारण वित्तीय अनियमितता की पुष्टि हुई। गौरतलब हो कि रांची में आयोजित 34वें राष्ट्रीय खेल में हुए घोटाला प्रकरण में एक अन्य आरोपी मधुकांत पाठक ने बाद में कोर्ट में सरेंडर कर दिया था।
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Edited By: Samridh Jharkhand
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