सिलिंडर के दाम बढ़ते ही कांग्रेस आक्रामक, बोली- फिर चला महंगाई का चाबुक; राहुल ने पेट्रोल-डीजल पर भी दी चेतावनी
कमर्शियल LPG सिलिंडर की कीमतों में एक ही दिन में 993 रुपये की बड़ी बढ़ोतरी की गई है। चार महीनों में कुल 1,518 रुपये का इजाफा हुआ है, जिससे महंगाई को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।
नई दिल्ली: आज आम जनता के लिए एक बड़ी खबर आई, कमर्शियल एलपीजी सिलिंडर की कीमतों में एक ही दिन में 993 रुपये का जबरदस्त इजाफा कर दिया गया। इस फैसले के साथ ही राजनीतिक घमासान भी शुरू हो गया। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा और इसे आम आदमी की जेब पर एक और चाबुक करार दिया।
कांग्रेस का हमला "महंगाई मैन मोदी का चाबुक फिर चला"
कांग्रेस पार्टी ने सोशल मीडिया पर तीखा पोस्ट साझा करते हुए कहा कि "महंगाई मैन मोदी" का चाबुक एक बार फिर जनता की पीठ पर पड़ा है। पार्टी ने आंकड़ों के साथ यह दिखाने की कोशिश की कि पिछले चार महीनों में कमर्शियल सिलिंडर कितना महंगा हो चुका है। कांग्रेस के अनुसार जनवरी से लेकर 1 मई 2026 तक कमर्शियल सिलिंडर की कीमतों में कुल 1,518 रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है। पार्टी ने इसे सरकार की "वसूली" करार दिया और कहा कि अभी साल के आठ महीने बाकी हैं।

राहुल गांधी बोले "यह चुनावी बिल है, थाली पर भी पड़ेगा असर"

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इस बढ़ोतरी का असर केवल होटल और ढाबे तक सीमित नहीं रहेगा — चाय की दुकान, बेकरी, हलवाई और हर उस इंसान की थाली पर पड़ेगा जो बाहर खाना खाता है। राहुल ने अंत में यह भी कहा कि "पहला वार गैस पर हुआ, अगला वार पेट्रोल-डीजल पर होगा।"
घरेलू सिलिंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं
गौरतलब है कि यह बढ़ोतरी सिर्फ कमर्शियल (19 किलो) एलपीजी सिलिंडर पर लागू हुई है। घरेलू उपयोग के 14.2 किलो वाले सिलिंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है और दिल्ली में यह अभी भी 913 रुपये पर उपलब्ध है।
दिल्ली में 19 किलो के कमर्शियल सिलिंडर की नई कीमत 3,071.50 रुपये हो गई है, जो पहले 2,078 रुपये थी। वहीं कोलकाता में यह 2,208 रुपये से बढ़कर 3,202 रुपये, मुंबई में यह 3,024 रुपये और चेन्नई में 3,237 रुपये हो गई है।
क्यों बढ़ी कीमतें? पश्चिम एशिया संकट है बड़ी वजह
ऑयल मार्केटिंग कंपनियां हर महीने की शुरुआत में एलपीजी की कीमतों की समीक्षा करती हैं। इस बार की बढ़ोतरी के पीछे पश्चिम एशिया में जारी संकट को प्रमुख कारण माना जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी की वजह से दुनिया भर में तेल और गैस की आपूर्ति में करीब 20 प्रतिशत की कमी आई है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ रहा है। बीते महीने यानी अप्रैल में भी घरेलू गैस सिलिंडर पर 60 रुपये और कमर्शियल सिलिंडर पर 196 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। मार्च में भी 114 रुपये बढ़े थे।
राजनीति गरमाई, सड़क से संसद तक असर
कुल मिलाकर यह मुद्दा अब सिर्फ रसोई गैस का नहीं रहा — यह एक राजनीतिक लड़ाई बन चुका है। विपक्ष इसे महंगाई की मार और सरकारी नीतियों की विफलता के रूप में पेश कर रहा है, जबकि सरकार की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गर्म होने की संभावना है, खासकर तब जब राहुल गांधी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भी बढ़ोतरी की चेतावनी दे चुके हैं।
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