नौसेना को मिला ‘महेंद्रगिरी’ युद्धपोत, ब्रह्मोस मिसाइल तैनाती से बढ़ेगी समुद्री ताकत; 75% स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल
भारतीय नौसेना को प्रोजेक्ट 17ए के तहत तैयार अत्याधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट ‘महेंद्रगिरी’ सौंपा गया है। इस युद्धपोत में 75 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है और इसमें ब्रह्मोस मिसाइल की तैनाती से भारत की समुद्री क्षमता और मजबूत होगी।
नई दिल्ली: भारतीय नौसेना को प्रोजेक्ट 17ए फ्रिगेट्स का आखिरी स्टेल्थ फ्रिगेट 'महेंद्रगिरी' गुरुवार को मिल गया। मुंबई में मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) ने आज देश में ही बना चौथा जहाज नौसेना को सौंपा, जिससे भारत की समुद्री ताकत काफी बढ़ गई है। जहाज का नाम ओडिशा स्थित पूर्वी घाट की एक पर्वत शिखर के नाम पर रखा गया है, जिस पर ब्रह्मोस मिसाइल की भी तैनाती हो सकती है।
प्रोजेक्ट 17ए कार्यक्रम के तहत मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) को चार और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) को तीन जहाजों का निर्माण सौंपा गया था। इस परियोजना के पहले छह जहाज तारागिरी, उदयगिरि, दूनागिरी, नीलगिरि, हिमगिरी और विंध्यगिरी 2019-2023 के बीच लॉन्च किए जा चुके हैं। भारतीय सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 17 अगस्त को विंध्यगिरी को कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) में लॉन्च किया था। भारत में पर्वत शृंखलाओं के नाम पर इन सभी जहाजों के नाम रखे गए हैं।


नौसेना को जहाज की आपूर्ति होने पर एमडीएल के सीएमडी कैप्टन जगमोहन और पूर्वी नौसेना कमान में चीफ स्टाफ ऑफिसर (टेक्निकल) रियर एडमिरल गौतम मारवाह ने नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में कागजात पर हस्ताक्षर किए। इस जहाज की आपूर्ति एमडीएल की व्यावसायिकता, विशेषज्ञता और मुश्किल वॉर प्लेटफॉर्म बनाने के अनुभव का सबूत है। यह जहाज आधुनिक तकनीक और भारत सरकार की 'मेक इन इंडिया' पहल के लिए मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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