नौकरियों के संकट पर आरके सिन्हा के विचार पढें : जरा भी ना घबराएं नौकरी खोने वाले
आरके सिन्हा
कोरोना का कठिन काल न मालूम कब खत्म होगा। इसने सारी दुनिया को तरह-तरह से संकट में डाल रखा है। लाखों लोगों की नौकरियां जा चुकी हैं। रोज ही पता चलता है कि फलां-फलां कंपनी ने अपने कर्मियों को नौकरी से हटा दिया। फिलहाल तो सरकारी नौकरियों के अलावा सभी नौकरियों पर संकट के बादल आ गए हैं। यह जरूरी नहीं है कि कौन इंसान किस पद पर काम कर रहा है। सभी को अपनी नौकरी जाने का खतरा सता रहा है। यह निश्चित रूप से आज के समय में एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। सच में कोरोना ने तो पूरी देश-दुनिया को ही बदल दिया है। कभी सोचता हूँ कि हमने इस तरह के कौन से पाप किए थे कि हमारे जीवनकाल में ही कोरोना आ गया। इसके दुष्प्रभावों से तो दुनिया का हरेक इंसान परेशान है। इससे सबको मिलकर ही लड़ना होगा। जब तक इसकी कोई वैक्सीन नहीं आ जाती तब तक इसके साथ ही हमें रहना सीखना होगा। इसके अतिरिक्त कोई दूसरा विकल्प भी तो नहीं है।


अगर हम पीछे मुड़कर देखें तो साल 2020-21 के आम बजट में देश में ज्यादा से ज्यादा नौकरियों को सृजित करने पर जोर दिया गया था। यह समय की मांग भी थी। बजट प्रस्तावों में नौकरियों को सृजित करने वाली योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया गया था। बजट प्रस्तावों से शिक्षा, इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, पर्यटन आदि क्षेत्रों में लाखों नौकरियों के सृजित होने की उम्मीद भी पैदा हुई थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में कहा भी था कि शिक्षा और नर्सिंग के क्षेत्र में सबसे ज्यादा नौकरियां आएंगी। हेल्थ सेक्टर तो लाखों लोगों को रोजगार दे ही रहा है। इस कोरोना काल में भी कम से कम इस हेल्थ सेक्टर में किसी की नौकरी तो नहीं ही गई होगी। देखा जाए तो हर आम बजट में नौजवानों को बेहतर रोजगार के अवसर प्रदान करवाने पर फोकस रखा जाता है। पर कोरोना ने सरकार की तमाम योजनाओं के आगे अवरोध खड़े कर दिए हैं। अब तो सरकार का पहला लक्ष्य कोरोना को हराना है। पर ये काम एक-दो दिन में तो नहीं होगा। इसमें वर्षों की मेहनत लगेगी।
इसके साथ ही कोरोना ने पर्यटन क्षेत्र का तो पूरी तरह सत्यानाश करके रख दिया है। इसमें रोजगार के बड़े अवसर पैदा होते रहते थे। पर लॉकडाउन में कोई घूमने कहां जाएगा। हर तरफ एक भय का वातावरण बना हुआ है। पिछले बजट में पर्यटन क्षेत्र के विकास के लिए 2,500 करोड़ रुपए रखे गए थे। भारत में पर्यटकों के आने की तादाद भी लगातार बढ़ रही थी। रोजगार भी बढ़ रहे थे। पर अब तो इस सेक्टर को भी नए सिऱे से खड़ा करना होगा।
कोरोना के कारण कारोबार और उद्योग धंधे को जो नुकसान हुआ है, नौकरियां और आजीविका जिस पैमाने पर खत्म हुई है और खेती किसानी जैसे खत्म हुई है, उसके बाद तो बड़े पूंजीपतियों के पास भी वर्किंग कैपिटल नहीं है। वे भी संकट में हैं। लॉकडाउन के बाद बाजार खुल भी रहे हैं, तो वहां पर ग्राहक ही नहीं हैं। पर धीरे-धीरे आने लगेंगे। हालात भी बेहतर होने लगेंगे। अब जिनकी नौकरियां गई हैं उन्हें सिर्फ नई नौकरी की तलाश में ही नहीं लगे रहना चाहिए। उन्हें अपने करियर के विकल्प खुले रखने होंगे। वे भगवान के लिए सिर्फ नौकरी ही ना खोजें। वे कोई छोटा ही सही बिजनेस करें। एक बार इस तरफ सोचें तो सही। सरकार अब युवाओं को अपना कोई काम शुरू करने के लिए मुद्रा लोन देती है। अभी तक 19 करोड़ नौजवानों को मुद्रा लोन दिए जा चुके हैं। सरकार का लक्ष्य 30 करोड़ लोगों को लोन देने का है, ताकि रोजगार बढ़ाया जा सके। ये मुद्रा लोन देश के युवाओं और नवयुवतियों की सोच और किस्मत को बदल सकता है। जिसने एक बार अपना कोई बिजनेस चालू करने के लिए लोन लिया हो तो फिर वह इंसान फिर नौकरी की तरफ तो नहीं भागेगा। वह तो बिजनेस ही करेगा। यकीन मानें कि अगर इन नए उद्यमियों का काम धंधा थोड़ा चल पड़ा तो ये कम से कम एक-दो लोगों को भी रोजगार दे ही देंगे। यानी एक झटके में देश की बेरोजगारी भी खत्म हो जाएगी और देश कोरोना के बड़े झटके से भी उबर जाएगा।
(लेखक वरिष्ठ संपादक, स्तंभकार और पूर्व सांसद हैं।)

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