चेहल्लुम के जुलूस में गूंजी या हुसैन की सदाएं
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रांची: शिया समुदाय ने हजरत इमाम हुसैन और करबला के शहीदों की याद और शहादत के चालीसवें पर अलम और ताबूत के साथ चेहल्लुम का मातमी जुलूस निकाला। खून से रंगीन हुई कर्बला, कर्बला आज भी है कर्बला। जहां लड़खड़ाए हैं अंबिया के कदम, उस जगह मुस्कुरा रहे हैं हुसैन। आज चेहल्लुम है उस बेकफन का, था नवासा रसूले जमन का। दीने खुदा को आले पयंबर पे नाज है, कुरआन की आयतों को इसी घर पे नाज है। कैद में बोली बाली सकीना कब घर जाएंगे फूफी अम्मा, होता नही है दर्द का द्रमा जैसे नोहों की गूंज थी।
नोहा खानी कासिम अली रांची, आमिर गोपालपुरी, एस नेहाल हुसैन, अमीर गोपालपुरी, इरशाद लखनऊ, राजा ने नोहा पेश किया। अंजुमन जाफरिया की ओर से अनवर हुसैन आर्केट से मातमी जुलूस शुरू हुआ और अंजुमन प्लाजा, उर्दू लाइब्रेरी, ओल्ड टैक्सी स्टैंड, डेली मार्केट, चर्च रोड, कर्बला चौक स्थित करबला पहुंचकर खत्म हुआ। सभी ने जुल्म, आतंकवाद और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़कर इमाम हुसैन के विचारों को जिंदा रखने का संकल्प लिया। इससे पहले सैयद मेहदी इमाम, जफरुल हसन के यहां हुई मजलिस में मुम्बई से आए मौलाना सैय्यद नसीर आजमी ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने अन्याय, आतंकवाद व असत्य के आगे घुटने नहीं टेके।
कलमा ए- हक के लिए इमाम हुसैन खुदा की राह में कुर्बान हो गए। वाकिया कर्बला के बाद इमाम हुसैन के घर वालो को कैदी बना लिया। उसी कैद खाने में इमाम हुसैन की 4 वर्ष की बेटी दम तोड़ दी। ये बात सुनकर लोग हाय हुसैन हाय हुसैन कह कर रोने लगे। मौलाना ने आगे कहा कि लगभग साल भर बाद यजीद सपना देखा कि पैगम्बर मोहम्मद सल्ल आते है और कहते है यजीद मेरे हुसैन ने तेरा किया बिगड़ा था उसे तूने कत्ल कर दिया। महिलाओं ने क्या बिगाड़ा है उसे तूने कैद कर रखा है। यजीद इसके बाद कैद से रिहा कर देता है।
इसी चेहल्लुम के मौके पर हजरत जेनब ने मजलिस बरपा की। उसी की याद में मजलिस अरबईन बरपा की जाती है। जंग ए ओहद के बाद मदीना में गम मनाया गया। इस दौरान बनारस से पंहुचे अनवर हुसैन ने भी अपने उदगार प्रकट किये। चेहल्लुम के इस मौके पर सैयद फराज अब्बास, मेहदी इमाम, अशरफ हुसैन, अता इमाम रजवी, जफरुलहसन, इकबाल हुसैन फातमी, अली हसन, तनवीर हसन, इकबाल फातमी, अमोद अब्बास, सैयद समर अली, ताबिश, एस मोहिब अली, सुरूर अली, हैदर अजीमाबादी, तनवीर अनवर, एहतेशाम अब्बास, शब्बीर, एसएम अब्बास, हैदर फराज, एसजी अब्बास, जीशान हैदर, फैजान हैदर समेत कई लोग उपस्थित थे।
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Edited By: Samridh Jharkhand
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