बंगाल में बदल गया खेल, अब CM की कुर्सी किसे? रेस में कौन सबसे आगे!
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 के रुझानों में भाजपा बढ़त बना चुकी है, अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा।
Who will Bengal Chief Minister in 2026: पश्चिम बंगाल में इस बार राजनीतिक इतिहास करवट ले रहा है। सोमवार, 4 मई को विधानसभा चुनावों की मतगणना जारी है और शुरुआती रुझानों ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। संकेत साफ हैं, बंगाल में इस बार सत्ता का रंग बदलने वाला है।
23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में संपन्न हुए मतदान के बाद आज सुबह 8 बजे से मतों की गिनती शुरू हुई। राज्य की कुल 294 विधानसभा सीटों में से 293 सीटों पर मतगणना चल रही है और लगभग सभी सीटों के रुझान सामने आ चुके हैं।
पश्चिम बंगाल का अगला CM कौन? तीन सबसे प्रबल दावेदार

इस सवाल का आधिकारिक जवाब तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह या प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ही दे सकते हैं। लेकिन फिलहाल जनता और सियासी हलकों में तीन नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं.
1. सुवेंदु अधिकारी: सबसे प्रबल दावेदार
सुवेंदु अधिकारी एक समय ममता बनर्जी के सबसे विश्वस्त सहयोगियों में गिने जाते थे और TMC के शीर्ष नेताओं में उनकी पहचान थी। लेकिन बाद में उन्होंने दीदी से खुलकर विद्रोह किया और भाजपा का दामन थाम लिया। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाते हुए वे ममता बनर्जी के सबसे मुखर और कड़े विरोधी बनकर उभरे।
2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम सीट पर स्वयं ममता बनर्जी को पराजित कर अपना राजनीतिक कद काफी ऊंचा कर लिया था। इस बार वे दो सीटों — नंदीग्राम और भवानीपुर — से चुनावी मैदान में हैं, जहां उन्होंने TMC को सीधी चुनौती दी है। अपने जुझारू तेवर, जमीनी पकड़ और ममता विरोधी छवि के दम पर सुवेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे नजर आते हैं।
2. समिक भट्टाचार्य: संगठन की ताकत के बल पर दावेदार
मुख्यमंत्री पद की इस दौड़ में समिक भट्टाचार्य की दावेदारी भी कम नहीं आंकी जा सकती। भाजपा ने जुलाई 2025 में उन्हें पश्चिम बंगाल प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी और 2026 का यह विधानसभा चुनाव उन्हीं के नेतृत्व में पार्टी ने लड़ा। ऐसे में यदि भाजपा इस चुनाव में बड़ी जीत हासिल करती है, तो उसका सेहरा काफी हद तक समिक भट्टाचार्य के सिर बंधेगा। प्रदेश अध्यक्ष के रूप में पार्टी को जीत दिलाने का यह श्रेय उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचा सकता है।
3. दिलीप घोष: संघ की पृष्ठभूमि से मजबूत दावा
तीसरे प्रमुख दावेदार हैं दिलीप घोष, जिनकी जड़ें RSS में गहरी हैं। वे संघ के प्रचारक रहे हैं और उसी माध्यम से भाजपा की राजनीति में सक्रिय हुए। इससे पहले वे पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। बीते कई वर्षों में बंगाल में भाजपा को संगठनात्मक रूप से खड़ा करने और विस्तार देने में उनका योगदान अतुलनीय रहा है। पार्टी उनकी वर्षों की मेहनत और निष्ठा को पुरस्कृत करते हुए उन्हें मुख्यमंत्री का पद दे सकती है।
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