साइबर ठगी में गया पैसा वापस पाने का सरकारी रास्ता, जिससे आज भी अनजान हैं अधिकांश लोग
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल से जुड़ा है धनराशि पुनर्प्राप्ति मंच
देश में बढ़ते साइबर अपराध के बीच अब ठगी का पैसा वापस पाने का सरकारी रास्ता भी मौजूद है। गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और 1930 हेल्पलाइन के जरिए पीड़ित समय रहते शिकायत दर्ज कर अपने पैसे को फ्रीज करवा सकते हैं।
आलोक वर्मा
रात के करीब दस बजे थे। लखनऊ के इंदिरानगर में रहने वाले रमेश वर्मा के मोबाइल पर एक कॉल आई। आवाज़ सधी हुई थी और लहजा बिल्कुल बैंक कर्मचारी जैसा। कॉल करने वाले ने कहा, “सर, आपका केवाईसी अपडेट नहीं हुआ है, खाता बंद हो जाएगा।” अगले बीस मिनट में रमेश के खाते से 28 हजार रुपये उड़ चुके थे।

साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती 24 घंटे सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं। जितनी देर शिकायत करने में होती है, उतनी ही जल्दी ठग पैसे को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर देते हैं या नकद निकाल लेते हैं। इसलिए ठगी होते ही राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना या सरकारी पोर्टल पर शिकायत दर्ज करना बेहद जरूरी है।
पोर्टल की प्रक्रिया काफी सरल है। शिकायतकर्ता को मोबाइल नंबर और ओटीपी के जरिए सत्यापन करना होता है। इसके बाद शिकायत की जानकारी संबंधित बैंक और पुलिस तक पहुंच जाती है। बैंक संदिग्ध खाते को रोक देता है और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र फर्जी खातों की पहचान करने में जुट जाता है।
शिकायत दर्ज करने के लिए लेनदेन की पहचान संख्या, ठगी की तारीख और समय, रकम, बैंक खाता विवरण और स्क्रीनशॉट जैसी जानकारियां जरूरी होती हैं। शिकायत दर्ज होने के बाद एक ट्रैकिंग नंबर मिलता है, जिससे पीड़ित अपने मामले की स्थिति देख सकता है।
हालांकि, हर मामले में पैसा वापस मिलना संभव नहीं होता। यदि रकम विदेश भेज दी गई हो या ठग पहले ही पैसा निकाल चुके हों, तो वापसी मुश्किल हो सकती है। बड़ी रकम की ठगी में साइबर थाने में एफआईआर दर्ज कराना भी जरूरी माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आज भी बड़ी संख्या में लोग इस सरकारी व्यवस्था के बारे में नहीं जानते। कई बार बैंक और स्थानीय स्तर पर भी इसकी जानकारी लोगों तक नहीं पहुंच पाती। यही कारण है कि कई पीड़ित समय रहते शिकायत नहीं कर पाते।
रमेश वर्मा के मामले में उनके बेटे ने कुछ घंटों के भीतर 1930 हेल्पलाइन पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराई। करीब तीन सप्ताह बाद 28 हजार रुपये में से 22 हजार रुपये वापस मिल गए। यह व्यवस्था चमत्कार नहीं करती, लेकिन समय पर उठाया गया कदम नुकसान को काफी हद तक कम कर सकता है।
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.
