डॉ. पी. के. अयंगर: वैज्ञानिक जिन्होंने भारत को परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बनाने में निभाई ऐतिहासिक भूमिका
पोखरण परमाणु परीक्षण की सफलता में निभाई थी महत्वपूर्ण भूमिका
भारत को परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले महान वैज्ञानिक डॉ. पी. के. अयंगर की जयंती पर देश उन्हें श्रद्धापूर्वक याद कर रहा है। वर्ष 1974 के पोखरण परमाणु परीक्षण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।
किसी भी राष्ट्र की शक्ति केवल उसकी सैन्य क्षमता, आर्थिक संसाधनों या भौगोलिक विस्तार से नहीं मापी जाती, बल्कि उसके वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता और तकनीकी उपलब्धियों से भी निर्धारित होती है। भारत को विश्व के परमाणु शक्ति संपन्न देशों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा करने वाले जिन वैज्ञानिकों ने अपना जीवन समर्पित किया, उनमें डॉ. पी. के. अयंगर का नाम अत्यंत सम्मान और गौरव के साथ लिया जाता है। आज उनकी जयंती के अवसर पर देश उस महान वैज्ञानिक को स्मरण कर रहा है, जिसने न केवल भारत के परमाणु कार्यक्रम को नई दिशा दी, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और वैज्ञानिक स्वावलंबन की मजबूत नींव भी रखी।
29 जून 1931 को जन्मे डॉ. पद्मनाभ कृष्णगोपाल अयंगर भारतीय परमाणु विज्ञान के उन चुनिंदा वैज्ञानिकों में शामिल थे, जिन्होंने स्वतंत्र भारत के वैज्ञानिक विकास की कहानी को आकार दिया। वे महान वैज्ञानिक डॉ. होमी जहांगीर भाभा की उस दूरदर्शी टीम का हिस्सा रहे, जिसने भारत को परमाणु अनुसंधान के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लिया था। अपने प्रारंभिक वैज्ञानिक जीवन से ही उन्होंने नाभिकीय भौतिकी, रिएक्टर प्रौद्योगिकी और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया।


उनकी सोच केवल परमाणु ऊर्जा तक सीमित नहीं थी। वे विज्ञान को राष्ट्र निर्माण का आधार मानते थे। उनका विश्वास था कि वैज्ञानिक प्रगति तभी सार्थक है जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने वैज्ञानिक समुदाय को हमेशा नवाचार, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय हितों के प्रति प्रतिबद्ध रहने की प्रेरणा दी।
डॉ. अयंगर अपने स्पष्ट और स्वतंत्र विचारों के लिए भी जाने जाते थे। उन्होंने भारत-अमेरिका असैनिक परमाणु समझौते पर खुलकर अपनी राय व्यक्त की थी। उनका मानना था कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते का मूल्यांकन राष्ट्रीय हितों के आधार पर किया जाना चाहिए। वैज्ञानिक होने के साथ-साथ वे एक जागरूक नागरिक भी थे, जो राष्ट्रीय नीतियों पर अपनी निष्पक्ष और तथ्यपरक राय रखने से कभी पीछे नहीं हटे।
जीवन के अंतिम वर्षों में उन्होंने शांति, परमाणु निरस्त्रीकरण और दक्षिण एशिया में स्थायी स्थिरता के पक्ष में आवाज उठाई। भारत और पाकिस्तान के बीच संवाद तथा विश्वास निर्माण को वे क्षेत्रीय शांति के लिए आवश्यक मानते थे। यह उनके व्यक्तित्व का वह पक्ष था जो बताता है कि परमाणु शक्ति के समर्थक होने के बावजूद वे मानवता और शांति के मूल्यों को सर्वोपरि मानते थे।
21 दिसंबर 2011 को डॉ. पी. के. अयंगर इस दुनिया से विदा हो गए, लेकिन उनकी वैज्ञानिक विरासत आज भी जीवित है। भारत का सशक्त परमाणु कार्यक्रम, आत्मनिर्भर अनुसंधान संस्थान और वैश्विक मंच पर वैज्ञानिक प्रतिष्ठा उनके योगदान की साक्षी हैं। वर्तमान समय में जब भारत विज्ञान, अंतरिक्ष, रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्रों में नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है, तब डॉ. अयंगर जैसे वैज्ञानिकों का योगदान और भी अधिक प्रासंगिक प्रतीत होता है।
उनकी जयंती केवल एक महान वैज्ञानिक को श्रद्धांजलि देने का अवसर नहीं है, बल्कि यह याद दिलाने का भी समय है कि राष्ट्र की प्रगति का वास्तविक आधार ज्ञान, अनुसंधान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण होता है। डॉ. पी. के. अयंगर का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है और उनकी उपलब्धियां भारतीय विज्ञान के इतिहास में सदैव स्वर्णिम अक्षरों में अंकित रहेंगी।
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.


