Hazaribagh News: हादसे में खोए हाथ-पैर, पर हिम्मत नहीं हारी
साइकिल से देश भ्रमण कर रहे हैं सजुल
by: Hritik Sinha
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सजुल का मानना है कि दिव्यांगता शारीरिक होती है, मानसिक नहीं।
हजारीबाग: एक हाथ और एक पैर से दिव्यांग होने के बावजूद अमर होसले बुलंद हैं। जीवन की कठिनाइयों को ताकत बनाकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि हिम्मत से बड़ी कोई ताकत नहीं। टाटीझरिया के रहने वाले 27 वर्षीय सजुल टुडू ने साइकिल के सहारे 156 दिनों में देश के 11 राज्यों का 7430 किलोमीटर का सफर पूरा किया। इस सफर का मकसद केवल दूरी तय करना नहीं था, बल्कि समाज को यह संदेश देना था कि दिव्यांगता किसी की राह में रुकावट नहीं बन सकती।
साल 2014 में ट्रांसमिशन लाइन पर काम करते समय ऊंचाई से गिरने पर सजुल टुडू ने एक हाथ और एक पैर खो दिया। लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय जिंदगी को नए सिरे से जीने का निर्णय लिया। डॉक्टरों ने भी हिम्मत दी और फिर 18 मार्च 2025 को उन्होंने हजारीबाग से अपनी यात्रा शुरू की।

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Edited By: Hritik Sinha
