15 अगस्त सिर्फ उत्सव नहीं, राष्ट्रनिर्माण और जिम्मेदारी का संकल्प दिवस भी है
आजादी केवल गुलामी से मुक्ति नहीं, बल्कि समानता, सम्मान, अवसर और न्यायपूर्ण समाज का सपना है।
स्वतंत्रता दिवस केवल तिरंगा फहराने और देशभक्ति के गीत गाने का पर्व नहीं, बल्कि उन वीर शहीदों के बलिदान को याद करने और राष्ट्रनिर्माण का संकल्प लेने का अवसर है। 15 अगस्त 1947 को मिली आजादी अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और संघर्ष का परिणाम थी।
आलेख: संजय कुमार धीरज
15 अगस्त का दिन हर भारतीय के दिल में देशभक्ति की एक अलग ही लहर जगा देता है। इसी दिन 1947 में भारत ने सदियों की गुलामी के बाद आजादी की सांस ली थी। अंग्रेजों के 200 साल के अत्याचार, लाठियां, जेल और फांसी के फंदे के बाद हमें यह आजादी मिली। भगत सिंह, महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, रानी लक्ष्मीबाई, चंद्रशेखर आजाद, सरदार वल्लभभाई पटेल, मंगल पांडे, विपिन चंद्र पॉल, लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक जैसे अनगिनत वीरों के बलिदान और लाखों अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग के कारण ही आज हम खुले आसमान में सांस ले पा रहे हैं। इसीलिए 15 अगस्त सिर्फ एक तारीख नहीं, यह हमारे गौरव, स्वाभिमान और एकता का प्रतीक है।
शहीदों ने हमें आजाद भारत दिया है, अब उसे बेहतर और मजबूत बनाना हमारी जिम्मेदारी है। जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र से ऊपर उठकर "राष्ट्र सर्वोपरि" की भावना रखना जरूरी है। नफरत नहीं, संवाद से समस्याओं का समाधान निकालने की पहल होनी चाहिए। जल, जंगल, जमीन बचाना हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। पेड़ लगाना, नदियों को साफ रखना और प्रदूषण कम करना भी हमारी जिम्मेदारियों में शामिल होने चाहिए। क्योंकि प्रकृति से जुड़कर ही हमारा भविष्य सुरक्षित रहेगा।
अपना काम पूरी निष्ठा से करना ही सबसे बड़ी देश सेवा है। चाहे आप किसान हों, शिक्षक, डॉक्टर, सैनिक या छात्र - हर कोई अपने स्तर पर देश बना रहा है। संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों के साथ-साथ मौलिक कर्तव्यों को भी निभाना अत्यन्त आवश्यक है। पिछले कुछ सालों से "हर घर तिरंगा" अभियान ने इस पर्व को जन-जन का त्योहार बना दिया है। छतों पर तिरंगा लहराकर हम उन शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होंने अपना आज हमारे कल के लिए कुर्बान कर दिया। यह अभियान हमें याद दिलाता है कि तिरंगा केवल कपड़े का टुकड़ा नहीं, यह 140 करोड़ भारतीयों के सपनों और बलिदान का प्रतीक है।
15 अगस्त हमें दो बातें सिखाता है। पहली - आजादी आसानी से नहीं मिलती। दूसरी - आजादी को संभालकर रखना और उसे आगे बढ़ाना उससे भी कठिन है। आइए इस 79वें स्वतंत्रता दिवस पर हम सब संकल्प लें कि हम भ्रष्टाचार, गरीबी, अशिक्षा और नफरत से मुक्त एक सशक्त, समृद्ध, आत्मनिर्भर और एकजुट भारत बनाएंगे। वही हमारे वीर शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।










