social awareness poem
साहित्य 

आग उगलते देखा है! — देशभक्ति से ओतप्रोत कविता

आग उगलते देखा है! — देशभक्ति से ओतप्रोत कविता “आग उगलते देखा है” एक सशक्त कविता है जो समाज, देश और बदलते इतिहास की पीड़ा व चेतना को उजागर करती है। कवि ने मिट्टी, संघर्ष और जनमानस की ताकत को प्रतीकात्मक रूप में प्रस्तुत किया है। कविता बताती है कि समय आने पर शांत दिखने वाली शक्तियां भी परिवर्तन की ज्वाला बन सकती हैं।
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साहित्य 

“कुछ मन की बातें” कविता में देश की सामाजिक सच्चाइयों की झलक

“कुछ मन की बातें” कविता में देश की सामाजिक सच्चाइयों की झलक “कुछ मन की बातें” कविता में कवि गुड्डू अनिल ने समाज और व्यवस्था की सच्चाइयों को सरल भाषा में व्यक्त किया है। कविता में भूख, राजनीति, कानून और सामाजिक असमानता को लेकर तीखा व्यंग्य किया गया है।
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साहित्य 

“बेटी की पुकार – एक भावपूर्ण कविता”

“बेटी की पुकार – एक भावपूर्ण कविता” यह कविता एक बेटी की भावनाओं को व्यक्त करती है, जो पढ़-लिखकर सम्मानजनक जीवन जीना चाहती है। मजदूरी और मजबूरी के जीवन से दूर, वह शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ने का सपना देखती है।
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