social awareness poem
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Read More... आग उगलते देखा है! — देशभक्ति से ओतप्रोत कविता
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By Mohit Sinha
“आग उगलते देखा है” एक सशक्त कविता है जो समाज, देश और बदलते इतिहास की पीड़ा व चेतना को उजागर करती है। कवि ने मिट्टी, संघर्ष और जनमानस की ताकत को प्रतीकात्मक रूप में प्रस्तुत किया है। कविता बताती है कि समय आने पर शांत दिखने वाली शक्तियां भी परिवर्तन की ज्वाला बन सकती हैं। “कुछ मन की बातें” कविता में देश की सामाजिक सच्चाइयों की झलक
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By Mohit Sinha
“कुछ मन की बातें” कविता में कवि गुड्डू अनिल ने समाज और व्यवस्था की सच्चाइयों को सरल भाषा में व्यक्त किया है। कविता में भूख, राजनीति, कानून और सामाजिक असमानता को लेकर तीखा व्यंग्य किया गया है। “बेटी की पुकार – एक भावपूर्ण कविता”
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By Mohit Sinha
यह कविता एक बेटी की भावनाओं को व्यक्त करती है, जो पढ़-लिखकर सम्मानजनक जीवन जीना चाहती है। मजदूरी और मजबूरी के जीवन से दूर, वह शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ने का सपना देखती है। 