संथाल हूल
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Read More... Ranchi News: 9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस: संघर्ष, संस्कृति और स्वाभिमान की विरासत से समावेशी विकास तक आदिवासी समाज का सफर
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By Suman Kumari
विश्व आदिवासी दिवस 9 अगस्त को दुनिया के मूलनिवासी समुदायों के अधिकार, संस्कृति, परंपरा और योगदान को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। भारत में आदिवासी समाज की पहचान उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, जल-जंगल-जमीन से गहरे संबंध और संघर्ष की गौरवशाली परंपरा से जुड़ी है। तिलका मांझी से बिरसा मुंडा और संथाल हूल से झारखंड आंदोलन तक आदिवासी समाज ने अपने अधिकारों के लिए लंबा संघर्ष किया है। संविधान, पांचवीं अनुसूची, PESA और वनाधिकार कानून ने उनके अधिकारों को कानूनी आधार दिया है। भारत की पहली सभ्यता आदिवासी थी, “वनवासी” राजनीति से सरना अस्मिता पर खतरा
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By Mohit Sinha
वरिष्ठ कांग्रेस नेता विजय शंकर नायक ने अपने लेख में दावा किया है कि भारत की सबसे पहली सभ्यता आदिवासी सभ्यता थी और बाद में वैदिक आर्य संस्कृति एवं हिंदू धर्म का विकास हुआ। उन्होंने सरना धर्म को प्रकृति आधारित सबसे प्राचीन जीवन दर्शन बताते हुए “वनवासी” शब्द के प्रयोग को आदिवासी अस्मिता कमजोर करने की राजनीतिक कोशिश बताया। 




