folk culture
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Read More... सिर्फ श्रद्धांजलि नहीं, सुरक्षा भी चाहिए: झारखंड के साहित्यकारों और कलाकारों के लिए कल्याण कोष की मांग
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By Mohit Sinha
झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत बनाने वाले साहित्यकारों और लोक कलाकारों की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। खोरठा साहित्यकार स्व. सुरेश कुमार विश्वकर्मा ‘सुकुमार’ और पद्मश्री डॉ. गिरिधारी राम गौंझू जैसे सांस्कृतिक व्यक्तित्वों के संघर्ष ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या समाज और व्यवस्था केवल सम्मान तक सीमित है। भोडा’— संथाल परगना की आदिवासी मिठाई, जो हाट-बाज़ार और प्रवास की कहानी कहती है
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By Susmita Rani
संथाल परगना के हाट-बाज़ारों में मिलने वाली पारंपरिक मिठाई ‘भोडा’ न सिर्फ स्वाद का हिस्सा है बल्कि प्रवास, मेहनतकश जीवन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की एक जीवंत कहानी भी है। झारखंड उत्सव के दूसरे दिन सिमडेगा में लोकसंस्कृति की रंगीन छटा बिखरी
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By Mohit Sinha
झारखंड राज्य स्थापना दिवस के 25वें वर्षगांठ पर आयोजित झारखंड उत्सव के दूसरे दिन सिमडेगा में पारंपरिक नृत्य, लोकगीत और रंगोली प्रतियोगिता के माध्यम से झारखंड की संस्कृति का शानदार प्रदर्शन हुआ 