सामाजिक संवाद
समाचार  ओपिनियन 

Opinion: अपने समय से आंखें चुराना सबसे बड़ी मक्कारी है, यह ईमानदार साहित्यकारिता से भी गद्दारी है

Opinion: अपने समय से आंखें चुराना सबसे बड़ी मक्कारी है, यह ईमानदार साहित्यकारिता से भी गद्दारी है अपने समय की सामाजिक समस्याओं से आंखें चुराना क्या साहित्य और मानवीयता के प्रति ईमानदारी हो सकती है? राजीव थेपड़ा के इस विचार लेख में इसी मूल सवाल के माध्यम से समाज में बढ़ती वैचारिक कटुता, अहंकार, संवादहीनता और आपसी अविश्वास पर गंभीर विमर्श किया गया है। लेख में कहा गया है कि किसी भी समस्या का समाधान स्वस्थ संवाद, आत्ममंथन और सभी पक्षों के प्रति सदाशयता से ही संभव है।
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