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“बस देख लेंगे”: भारतीय टालमटोल संस्कृति पर तीखा व्यंग्य

“बस देख लेंगे”: भारतीय टालमटोल संस्कृति पर तीखा व्यंग्य “बस देख लेंगे” शीर्षक यह व्यंग्यात्मक लेख भारतीय समाज में प्रचलित उस मानसिकता पर रोशनी डालता है, जहाँ समस्याओं का समाधान करने की बजाय उन्हें टालने की प्रवृत्ति अधिक दिखाई देती है। घर के छोटे कामों से लेकर दफ्तर और राजनीति तक, यह तीन शब्दों का वाक्य अक्सर जिम्मेदारियों को आगे बढ़ाने का माध्यम बन जाता है।
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