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डीएमएफ की राशि के व्यय के लिए ऊर्जा क्षेत्र को अन्य प्राथमिकता वाला नहीं प्राथमिकता वाले क्षेत्र में लाना जरूरी  रांची : पिछले सप्ताह आइफॉरेस्ट की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि झारखंड जैसे खनिज उत्पादक राज्य में डीएमएफ के पैसे का उपयोग एनर्जी गैप को भरने में करना एक अच्छा विकल्प हो

रांची : भारत में गरीबी-अमीरी की बढती खाई की तरह स्वच्छ ऊर्जा की खाई भी लगातार बढ रही है। दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों के अच्छे प्रदर्शन और पूर्वी राज्यों के सैद्धांतिक घोषणाओं तक सीमित रहने भर से यह अंतर और तेजी से बढ रहा है। वर्ष 2022 में भारत ने 175 गीगावाट स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन

एक नए वैज्ञानिक अध्ययन से पता चलता है कि अगर भारत बिजली क्षेत्र में चरणबद्ध तरीके से अपनी कोयले पर निर्भरता कम करता है तो न सिर्फ साल 2040 की शुरुआत से ही वह बिजली की गिरती कीमतों का फायदा उठा सकता है बल्कि साल 2050 तक बिजली की कीमतों को मौजूदा दरों के मुक़ाबले

भारत में जारी एनर्जी ट्रांजिशन प्रक्रिया में उन कंपनियों की अहम भूमिका है जो जीवाष्म ऊर्जा आधारित कारोबार में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से संलग्न है। यह उन कंपनियों के अस्तित्व व स्वयं की प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है। भारत में 83 प्रतिशत कोयला उत्पादित करने वाली कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) की भी

सौर ऊर्जा के प्रासंगिकता और उपलब्धता को बल देते हुए हस्क पावर सिस्टम्स ने EDFI ElectriFI के साथ ग्रामीण भारत में फैले 80 नए समुदायों में सोलर माइक्रोग्रिड लगाने के लिए ऋण सुविधा उपलब्ध कराने के एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। हस्क पावर सिस्टम्स ने घोषणा की है कि उसने यूरोपियन यूनियन से वित्त

सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ने साल 2050 तक नेट ज़ीरो एमिशन का स्तर हासिल करने का लक्ष्य तय करते हुए $ 5 बिलियन (लगभग 39,760 करोड़ रुपये) से अधिक के निवेश की योजना बनाई है। इस क्रम में दक्षिण कोरियाई कंपनी ने कहा है कि वह इस दशक के अंत तक स्मार्टफोन, टेलीविजन और उपभोक्ता डिवीजनों में

भारत के केंद्र सरकार के स्वामित्व वाले तीन सबसे बड़े उद्यम या पीएसयू – कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल), एनटीपीसी, और भारतीय रेलवे- मिल कर स्वच्छ ऊर्जा बाजार का एक बड़ा हासिल कर सकते हैं और साथ ही देश को अपने जलवायु लक्ष्यों तक पहुंचने में भी मदद कर सकते हैं। इस बात की जानकारी मिलती

रांची : अक्सर जब जीवाष्म ऊर्जा से स्वच्छ ऊर्जा की ओर ट्रांजिशन की चर्चा होती है, तो कामगारों के कौशल को लेकर चिंता प्रकट की जाती है। यह कहा जाता है कि स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अधिक कौशल वाले कामगारों की जरूरत है और इसके लिए उन्हें प्रशिक्षत करने की जरूरत है। भारत और

नयी दिल्ली : भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने थर्मल पॉवर प्लांट के उत्सर्जन मानदंडों में नया संशोधन किया है। इस संशोधन के बाद पर्यावरणविद सुनीता नारायण की अगुवाई वाली संस्था सेंटर फॉर साइंस एंड एनवॉयरमेंट ने इसकी कड़ी आलोचना की है। उत्सर्जन मानदंडों में यह संशोधन 2015 में जारी अधिसूचना में किया

सस्टेनेबल मोबिलिटी नेटवर्क और सीएमएसआर कंसल्टेंट्स के एक ताजा सर्वे से जाहिर हुआ है कि उपभोक्ता वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ई-कॉमर्स तथा डिलीवरी कंपनियों द्वारा इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाते हुए देखना चाहते हैं। यह सर्वे मुंबई, पुणे, दिल्ली, कोलकाता, बेंगलुरु तथा चेन्नई जैसे छह बड़े शहरों में 9048