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दुनिया में तीन में एक बच्चा होता है तसकरी का शिकार, सिर्फ गरीब ही नहीं हर क्षेत्र होता है इसका शिकार : यूनिसेफ

वर्चुअल सेमिनार में शामिल हुए प्रतिभागी।

यूनिसेफ ने मानव तस्करी पर किया वर्चुअल परिचर्चा का आयोजन, विधायकों ने लिया हिस्सा

रांची : यूनिसेफ – झारखंड ने पॉलिसी डेवलपमेंट एडवाइजरी ग्रुप (पीडीएजी) के सहयोग से राज्य में लड़कियों एवं महिलाओं की तस्करी की रोकथाम को लेकर आज वर्चुअल सेमिनार का आयोजन किया। -हजयारखंड की समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री जोबा मां-हजयी ने मुख्य अतिथि के रूप में सत्र को संबोधित किया। कार्यक्रम में विधायक  दीपिका सिंह, बैद्यनाथ राम, सुखराम उरांव तथा दीपक बिरुआ ने भी हिस्सा लिया और इस मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त किए।

मुख्य अतिथि के रूप में ऑनलाइन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए झारखंड सरकार के समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री, जोबा मांझी ने कहा, ‘‘ग्राम बाल संरक्षण समिति को सक्रिय करके सामुदायिक सुरक्षा नेटवर्क को मजबूत करना आवश्यक है। इसके अलावा, कमजोर बच्चों पर नजर रखना और उन्हें सरकारी कार्यक्रमों एवं योजनाओं का लाभ प्रदान करना तथा जिला स्तर पर कानून प्रवर्तन को मजबूत करके बाल संरक्षण सेवाओं तथा मानव तस्करी विरोधी इकाइयों को मजबूत करना भी महत्वपूर्ण है।’’

मानव तस्करी पर अपने विचार साझा करते हुए महगामा की विधायक दीपिका पांडेय सिंह ने कहा, “हमें राज्य में मानव तस्करी पर सटीक डेटा जुटाने तथा इस मुद्दे पर समुदाय और पंचायत स्तर पर जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता है, ताकि लोग मानव तस्करी का शिकार होने से बच सकें।

ग्राम स्तरीय बाल संरक्षण इकाइयों को सुदृढ किया जाना भी जरूरी है, ताकि बच्चों पर नजर रखी जा सके और उनकी बेहतरी को सुनिश्चित किया जा सके। इसके अलावा, मानव तस्करी के खिलाफ कानून को मजबूती प्रदान करने एवं दोषियों पर कानून सम्मत कार्रवाई करना भी समय की मांग है, ताकि एक कड़ा संदेश इस अमानवीय अपराध के खिलाफ प्रसारित किया जा सके।’

लातेहार के विधायक बैद्यनाथ राम ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, “हम सभी को राज्य में बच्चों, महिलाओं और लड़कियों की तस्करी के खिलाफ चुप्पी तोड़ने की जरूरत है। खासकर पीड़ित और उनके परिवार को आवाज उठानी चाहिए, ताकि दोषियों को सजा मिल सके। इसके अलावा, हमें मजदूरों एवं श्रमिकों के पंजीकरण को सुनिश्चित करने की भी आवश्यकता हैै, ताकि राज्य से बाहर जाने पर उन्हें ट्रैक किया जा सके। बच्चों की सुरक्षा और उनकी भलाई को सुनिश्चित करने के लिए राज्य के हर जिले में आश्रय गृह स्थापित किए जाने चाहिए।’’

राज्य में मानव तस्करी तथा लड़कियों एवं महिलाओं पर इसके प्रभाव की वास्तविक तस्वीर पेश करते हुए, यूनिसेफ – झारखंड के प्रमुख प्रशांत दास ने कहा, ‘‘बच्चे, महिलाएं, प्रवासी, शरणार्थी तथा विशेष रूप से विस्थापित लोगों के मानव तस्करी किए जाने की संभावना अधिक रहती है। मानव तस्करी आर्थिक एवं सामाजिक विकास के लिए भी एक मुद्दा है। हालांकि, यह संगठित अपराध केवल संवेदनशील एवं गरीब क्षेत्रों में ही नहीं होता है, बल्कि यह हर क्षेत्र में होता है। झारखंड में लड़कियों की तस्करी के मामले सामने आते रहते हैं और कुछ को इससे बाहर भी निकाला जाता है। लेकिन हमें ऐसा होने से रोकने के तरीके खोजने की जरूरत है। किशोर लड़कियों एवं लड़कों के लिए जागरूकता, उपलब्धता, शिक्षा की निरंतरता तथा कौशल विकास कार्यक्रमों को बढाने से भी तस्करी को रोकने में मदद मिलेगी। प्रवासी कामगारों का पंजीकरण पंचायत स्तर पर सुनिश्चित किया जाना चाहिए। सत्र का परिचय देते हुए, यूनिसेफ की कम्यूनिकेशन ऑफिसर, आस्था अलंग ने कहा, मानव तस्करी एक गंभीर अपराध है और मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन भी है। दुनिया भर में, तीन में से एक बच्चा मानव तस्करी का शिकार होता है। मानव तस्करी के कई कारण हैं, यह वेश्यावृत्ति तथा यौन शोषण के लिए किया जाता है। पीड़ित की आर्थिक स्थिति तथा शिक्षा का भी इसके साथ संबंध होता है। ”

डेटा एवं रिपोर्ट के माध्यम से झारखंड में मानव तस्करी के मुद्दे को पेश करते हुए यूनिसेफ – झारखंड की बाल संरक्षण विशेषज्ञ प्रीति श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार – झारखंड मानव तस्करी का देश में प्रमुख केंद्र है। यहां के खूंटी, गुमला, सिमडेगा, लोहरदगा एवं लातेहार जैसे जिले में सर्वाधिक मानव तस्करी के मामले पाए जाते हैं। मानव तस्करी की समस्या पर प्रभावी प्रतिक्रिया के लिए रोकथाम, अभियोजन, संरक्षण और पुनर्वास पर ध्यान केंद्रित करते हुए एक दीर्घकालिक सुनियोजित कार्रवाई की आवश्यकता है। मजबूत कानून प्रवर्तन को सुनिश्चित किया जाना चाहिए, जिसमें एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) को मजबूत बनाना, नियमित प्रशिक्षण तथा पुलिस, अभियोजकों, चाइल्डलाइन, जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति, गैर सरकारी संगठनों, समुदाय आधारित संगठनों तथा पंचायती राज संस्थानों को संवेदनशील बनाना शामिल है। उच्च शिक्षा को पूरा करने, कौशल विकास, आय सृजन के अवसर, युवा लड़कियों एवं लड़कों के लिए नौकरी प्लेसमेंट में सहायता, तस्करी के बारे में माता-पिता, समुदाय तथा बच्चों एवं किशोरों के बीच जागरूकता बढाने की आवश्यकता है। इसके अलावा, रिपोर्ट किए गए लापता मामलों पर त्वरित कार्रवाई के माध्यम से मानव तस्करी के रोकथाम एवं तस्करी के खिलाफ लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था को मजबूत किया जा सकेगा।’’

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