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पेगासस फोन हैकिंग विवाद क्या है और इस पर सरकार ने संसद में क्या कहा?

Photo Credit - Social Media.

नयी दिल्ली : पेगासस फोन हैकिंग का मामला भारत में दो दिनों से गर्म है। इस मामले को लेकर सोमवार को संसद का सत्र शुरू होने पर सरकार की ओर से भी जवाब आया, जिसमें सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ऐसी रिपोर्टाें पर संदेह जताया।

न्यूज वेबसाइट द वायर की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उसके सहित 16 मीडिया संगठनों की पड़ताल दिखाती है कि इजराइल के एनएसओ ग्रुप के पेगासस स्पाटवेेयर द्वारा स्वतंत्र पत्रकारों, स्तंभकारों, क्षेत्रीय मीडिया के साथ हिंदुस्तान टाइम्स, द हिंदू, इंडियन एक्सप्रेस, द वायर, न्यूज 18, इंडिया टुडे, द पायनियर जैसे राष्ट्रीय मीडिया संगठनों को भी निशाना बनाया गया था।

वायर ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है: वायर और सहयोगी मीडिया संस्थानों द्वारा दुनिया भर में हजारों फोन नंबरों. जिन्हें इजरायली कंपनी के विभिन्न सरकारी ग्राहकों द्वारा जासूसी के लिए चुना गया था, के रिकॉर्ड्स की समीक्षा के अनुसार, 2017 और 2019 के बीच एक अज्ञात भारतीय एजेंसी ने निगरानी रखने के लिए 40 से अधिक भारतीय पत्रकारों को चुना था।

वायर ने अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया है कि उसके दो संस्थापक संपादक, एक अंग्रेजी अखबार के संपादक सहित कई नाम शामिल हैं। इसकी रिपोर्ट में यह संकेत दिया गया है कि वैसी खबरों जो सरकार को कटघरे में खड़ा करती है को कवर करने वालों को प्रमुखता से निशाने पर लिया गया।

पेगासस व भारत

2010 में स्थापित एनएसओ ग्रुप को पेगासस के जनक के रूप में देखा जाता है। पेगासस एक ऐसा स्पायवेयर है जो इसे संचालित करने वालों को दूर से ही किसी स्मार्टफोन को हैक करने के साथ ही उसके माइक्रोफोन और कैमरा सहित, इसके कंटेट और इस्तेमाल तक पहुंच देता है।

वायर की रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी ने हमेशा इस बात जोर दिया है कि पेगासस को निजी संस्थाओं या किसी भी सरकार को नहीं बेचा जाता है। एनएसओ ने द वायर उसके मीडिया सहयोगियों को लिखे पत्र में दोहराया कि वह अपने स्पायवेयर को केवल जांची परखी सरकार को बेचता है।

रिपोर्ट के अनुसार, पेगासस इस बात की पुष्टि नहीं करेगा कि भारत सरकार इसकी ग्राहक है या नहीं लेकिन भारत में पत्रकारों और अन्य लोगों के फोन में पेगासस की मौजूदगी और संभावित हैकिंग के लिए चुने लोगों को देख कर यह स्पष्ट होता है कि यहां एक या इससे अधिक आधिकारिक एजेंसियां सक्रिय रूप से इस स्पायवेयर का उपयोग कर रही हैं।

 

सरकार ने संसद में क्या कहा?

नए सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को लोकसभा में रिपोर्टाैं पर संदेह जताया। उन्होंने कहा कि संसद के मानसून सत्र से एक दिन पहले प्रेस रिपोर्ट आयी है। यह संयोग नहीं हो सकता है।

उधर, इजराइली कंपनी एनएसओ ग्रुप ने अपने पेगासस सॉफ्टवेयर को लेकर हुए खुलासों पर बयान जारी किया। कंपनी ने कहा है कि फॉरबिडेन स्टोरीज की रिपोर्ट गलत धारणाओं और अपुष्ट सिद्धांतों से भरी हुई है।

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