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टोकियो पैरालंपिक : नोएडा के डीएम सुहास यथिराज ने बैडमिंटन में जीता सिल्वर, आइएएस पत्नी ने दी ऐसी प्रतिक्रिया

जापान की राजधानी टोकियो में जारी पैरा ओलिंपिक में भारत ने एक और उपलब्धि हासिल की है। पैरा बैडमिंटन प्लेयर व आइएएस अधिकारी एवं इस समय नोएडा के डीएम के रूप में तैनात सुहास एल यथिराज ने रविवार को सिल्वर मेडल जीता।

Suhash Yatiraj.

नयी दिल्ली : जापान की राजधानी टोकियो में जारी पैरा ओलिंपिक में भारत ने एक और उपलब्धि हासिल की है। पैरा बैडमिंटन प्लेयर व आइएएस अधिकारी एवं इस समय नोएडा के डीएम के रूप में तैनात सुहास एल यथिराज ने रविवार को सिल्वर मेडल जीता। उनकी जीत पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यराज ने उन्हें बधाई दी है।

सुहास एल यथिराज रविवार को पुरुष एकल एसएसल 4 क्लास बैडमिंटन प्रतिस्पर्धा के फाइनल में शीर्ष वरीयता प्राप्त फ्रांस के लुकास माजूर से करीबी मुकाबले में हार गए, इस कारण उन्हंें सिल्वर हासिल हुआ।

भारत ने पैरालंपिक में अबतक 18 मेडल जीता है, जिसमें चार गोल्ड, आठ सिल्वर व छह ब्रांज मेडल हैं। सुहास देश के पहले ऐसे आइएएस अधिकारी हैं जिन्हें पैरालंपिक में हिस्सा लेने का मौका मिला और उन्होंने सिल्वर मेडल अपनी झोली में डाला। इदससे पहले वे युगांडा पैरा बैडमिंटन इंटनरनेशनल टूर्नामेंट में कांस्य पदक व तुर्की इंडरनेशनल बैडमिंटन टूर्नामेंट में पुरुष सिंगल का खिताब हासिल कर चुके हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनकी जीत के बाद उन्हें बधाई देते हुए कहा है कि पैरालंपिक में भारत अच्छा प्रदर्शन कर रहा है और यह खुशखबरी आयी है कि नोएडा के डीएम सुहास एल यथिराज ने सिल्वर मेडल जीता है, इसके लिए मैं उन्हें हृदय से बधाई देता हूं।

वहीं, सुहास से इस जीत पर कहा है कि वे सिल्वर मेडल हासिल कर बहुत खुश हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने उन्हें बधाई देने के लिए फोन किया था।

 

सुहास यथिराज की मां जयश्री सीएस ने कहा है कि उनके बेटे ने आज भारत को गौरवान्वित किया है। यह हमारे लिए खुशी का पल है। एक मां होने के नाते मुझे बेटे पर गर्व है।


वहीं, सुहास एल यथिराज की पत्नी एवं आइएएस अधिकारी व इस वक्त गाजियाबाद की एडीएम रितु सुहास ने कहा कि उन्होंने बहुत अच्छा मैच खेला था। मुझे उन पर गर्व है। यह उनके छह सालों के मेहनत की पराकाष्ठा है। उन्होंने कहा कि उनके पति का सपना पैरालंपिक में खेलना था और इसमें उन्होंने अपने जीवन के छह साल समर्पित कर दिए। मैंने उन्हें आज परिणाम की चिंता किए बिना अपना सर्वश्रेष्ठ खेल खेलने के लिए कहा था।


 

 

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