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केंद्र शासित जम्मू कश्मीर के पहले पाॅलिटिकल एलजी मनोज सिन्हा को निबटना होगा इन चुनौतियों से

Manoj Sinha is New Lieutenant Governor of Jammu and Kashmir

नयी दिल्ली : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जम्मू कश्मीर के उप राज्यपाल के रूप में मनोज सिन्हा की नियुक्ति को मंजूरी दे दी. पिछले साल पांच अगस्त को केंद्र ने अनुच्छेद 370 व 35ए हटाते हुए जम्मू कश्मीर को जम्मू कश्मीर व लद्दाख दो केंद्रशासित प्रदेश में अस्थायी रूप से विभावित किया था. उसके बाद से वहां उप राज्यपाल की नियुक्ति की जाने लगी. उसके बाद 31 अक्तूबर को वहां गिरिश चंद्र मुर्मू को पहले उप राज्यपाल की नियुक्ति की गयी थी.


गिरिश चंद्र मुर्मू गुजरात कैडर के आइएएस अधिकारी हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी माने जाते हैं. वे मोदी के मुख्यमंत्री रहते उनके साथ वहां काम कर चुके हैं. ऐसे में उन्हें अब केंद्र में कैग नियुक्त किए जाने की संभावना है. मौजूदा कैग राजीव महर्षि का कार्यकाल इस दो दिन बाद आठ अगस्त को समाप्त हो रहा है.

मनोज सिन्हा एक तेज-तर्रार नेता हैं और मोदी सरकार – वन में केंद्र में स्वतंत्री प्रभार के राज्य मंत्री के रूप में उनके कामकाज का शानदार रिकार्ड रहा है. वे गाजीपुर से 2019 में राजनीतिक समीकरण की वजह से गाजीपुर से चुनाव हार गए. उस समय भी यह मांग उठी थी कि उन्हें राज्यसभा भेजा जाए व केंद्र में मंत्री बनाया जाए ताकि उनकी प्रतिभा का भरपूर उपयोग हो सके.

अब मनोज सिन्हा को जम्मू कश्मीर के उप राज्यपाल के रूप में अधिक चुनौती पूर्ण जिम्मेवारी का निर्वाह करना होगा. कश्मीर एक संवेदनशील इलाका है. वहां आने वाले दिनों में विधानसभा चुनाव सहित अन्य निर्णय लेने होंगे. सुरक्षा व आतंकवाद जैसी चुनौतियां भी हैं. आतंकवादी अब लागातर लोकल बाॅडी के प्रमुखों व राजनीतिक कार्यकर्ताओं की हत्या कर रहे हैं. धारा 370 को हटाए जाने के बाद भी परिस्थितियां बदली हैं. इन तमाम चुनौतियों से तेज-तर्रार मनोज सिन्हा को निबटना होगा.

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