Breaking News

Renewable Energy

संयुक्त राष्ट्र की 27वीं जलवायु वार्ता या कॉप 27, आज मिस्र में समाप्त हुई। जहां एक ओर इस सम्मेलन में जलवायु संकट के सबसे कमजोर लोगों पर असर को कम करने पर अहम फैसले लिए गए, वहीं इस वार्ता में ग्लोबल वार्मिंग के कारणों को दूर करने के लिए कुछ खास देखने या सुनने को

आईईए के वर्ल्‍ड एनर्जी आउटलुक (World Energy Outlook) के ताजा संस्‍करण के मुताबिक युक्रेन पर रूस की सैन्‍य कार्रवाई के कारण उत्‍पन्‍न हुआ वैश्विक ऊर्जा संकट गहरे और लम्‍बे वक्‍त तक बरकरार रहने वाले बदलावों की वजह बन रहा है। इन परिवर्तनों में ऊर्जा प्रणाली में अधिक टिकाऊ और सुरक्षित रूपांतरण को तेज करने की

एक अध्ययन में पाया गया है कि अगर पवन, सौर और जल विद्युत उत्पादन में कोई वृद्धि नहीं होती तो जीवाश्म ईंधन से बिजली उत्पादन चार प्रतिशत बढ़ जाता। दरअसल एनर्जी थिंक टैंक एम्बर द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में पाया गया है कि 2022 की पहली छमाही में अकेले रिन्यूबल एनर्जी ने वैश्विक बिजली की

रिन्यूएबल एनर्जी नामक पत्रिका में हाल ही में प्रकाशित एक लेख से इस बात की प्रबल संभावना जाहिर हुई है कि दिल्ली वर्ष 2050 तक जीवाश्म ईंधन से छुटकारा पाकर 100% अक्षय ऊर्जा पर निर्भरता का लक्ष्य हासिल कर सकती है। अपनी तरह के इस पहले शोध में दिल्ली जैसे उत्तर भारतीय महानगर में 100%

डीएमएफ की राशि के व्यय के लिए ऊर्जा क्षेत्र को अन्य प्राथमिकता वाला नहीं प्राथमिकता वाले क्षेत्र में लाना जरूरी  रांची : पिछले सप्ताह आइफॉरेस्ट की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि झारखंड जैसे खनिज उत्पादक राज्य में डीएमएफ के पैसे का उपयोग एनर्जी गैप को भरने में करना एक अच्छा विकल्प हो

महामारी के बाद इस क्षेत्र में भारत ने वापसी की, मगर महिलाओं की भागीदारी अब तक के सबसे निचले स्तर पर डिस्ट्रीब्यूटेड रिन्यूबल एनेर्जी (डीआरई/DRE) उद्योग में रोजगार से जुड़े एक सबसे व्यापक अनुसंधान से पता चलता है कि इस क्षेत्र में बढ़ती मांग के चलते हजारों औपचारिक और अनौपचारिक नौकरियों का सृजन हो रहा

रांची : भारत में गरीबी-अमीरी की बढती खाई की तरह स्वच्छ ऊर्जा की खाई भी लगातार बढ रही है। दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों के अच्छे प्रदर्शन और पूर्वी राज्यों के सैद्धांतिक घोषणाओं तक सीमित रहने भर से यह अंतर और तेजी से बढ रहा है। वर्ष 2022 में भारत ने 175 गीगावाट स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन

इस साल के अंत तक भारत ने अपने लिए 175 गीगावाट की रिन्यूबल एनर्जी क्षमता स्थापना का लक्ष्य रखा था। मगर बीती अगस्त तक भारत ने इस लक्ष्य का दो तिहाई हासिल किया है। मतलब दिसंबर तक लक्ष्य का एक तिहाई हासिल करना बाकी है। फिलहाल इस दो तिहाई के आंकड़े को हासिल करने में

जलवायु परिवर्तन के खिलाफ़ जारी इस वैश्विक जंग में प्रधानमंत्री मोदी ने लगातार एक शीर्ष भूमिका निभाई है। बदलती जलवायु के प्रति उनकी चिंता और इस संवेदनशीलता और सजगता का उदाहरण भारत की राष्ट्रीय विद्युत नीति के ताज़े मसौदे में साफ झलकता है। इस मसौदे में सौर ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि और वर्ष 2030 तक

प्रधानमंत्री मोदी ने COP 26 में दुनिया को बता दिया कि भारत साल 2030 तक अपनी गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता को 500 गीगावाट (GW) तक पहुंचाएगा और इस लक्ष्य का आधा रिन्यूबल ऊर्जा से हासिल किया जाएगा। साथ ही, उत्सर्जन में एक बिलियन टन की कमी और 2030 तक सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन तीव्रता में