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Just Transition

एक नए वैज्ञानिक अध्ययन से पता चलता है कि अगर भारत बिजली क्षेत्र में चरणबद्ध तरीके से अपनी कोयले पर निर्भरता कम करता है तो न सिर्फ साल 2040 की शुरुआत से ही वह बिजली की गिरती कीमतों का फायदा उठा सकता है बल्कि साल 2050 तक बिजली की कीमतों को मौजूदा दरों के मुक़ाबले

भारत में जारी एनर्जी ट्रांजिशन प्रक्रिया में उन कंपनियों की अहम भूमिका है जो जीवाष्म ऊर्जा आधारित कारोबार में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से संलग्न है। यह उन कंपनियों के अस्तित्व व स्वयं की प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है। भारत में 83 प्रतिशत कोयला उत्पादित करने वाली कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) की भी

झारखंड में जस्ट ट्रांज़िशन प्रक्रिया पर ठोस नीतिगत पहल आवश्यक स्टेकहोल्डर्स ने भविष्योन्मुखी अर्थव्यवस्था के निर्माण के लिए विशेष टास्क फोर्स गठन करने पर दिया जोर रांची : सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट, सीड द्वारा एक राज्यस्तरीय स्टेकहोल्डर्स कांफ्रेंस मेकिंग जस्ट ट्रांज़िशन ए रियलिटी इन झारखंड का आयोजन बुधवार, 14 सितंबर 2022 को होटल

रांची : अक्सर जब जीवाष्म ऊर्जा से स्वच्छ ऊर्जा की ओर ट्रांजिशन की चर्चा होती है, तो कामगारों के कौशल को लेकर चिंता प्रकट की जाती है। यह कहा जाता है कि स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अधिक कौशल वाले कामगारों की जरूरत है और इसके लिए उन्हें प्रशिक्षत करने की जरूरत है। भारत और

केंद्र और राज्य सरकारें सही दिशा में काम करें तो वर्ष 2026 तक वायु ऊर्जा देश की कुल स्वच्छ ऊर्जा क्षमता में कर सकती है 23.7 गीगावॉट वृद्धि में मदद   भारत में एनर्जी ट्रांजिशन को बल देने में पवन ऊर्जा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है

राहुल सिंह की रिपोर्ट हजारीबाग जिले में पड़ने वाला बड़कागांव प्रखंड मुख्यालय एक छोटी-सी जगह है, जो राजधानी रांची से करीब 80 किलोमीटर और अपने जिला मुख्यालय से 25 किमी दूर है। झारखंड जैसे बेहद पुराने कोयला उत्पादक राज्य में बड़कागांव एक उभरता हुआ नया कोयला खनन क्षेत्र है, जहां पिछले डेढ-दो दशक में एक

गेटिंग एशिया टू नेट जीरो से संबंधित हाई लेवल पॉलिसी कमिशन का कहना है कि भारत जलवायु से संबंधित अपनी संकल्पबद्धताओं को पूरा करके और उन्हें बढ़ाकर वित्त संबंधी जोखिमों को खत्म कर सकता है और स्वच्छ ऊर्जा में रूपांतरण को बहुत बेहतर बना सकता है।     एक ताजा अध्ययन के मुताबिक प्रदूषणकारी तत्वों के उत्सर्जन को शून्य करने से भारत की अर्थव्यवस्था को नई ताकत

इस गांव के अधिकतर लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार और आजीविका के लिए कोयला खनन परियोजनाओं पर आश्रित हैं। यह स्थिति उन्हें असहज करती है और वे एक दायरे से बाहर मुखर नहीं हो पाते हैं। अधिकतर लोग नपे-तुले अंदाज में बात करते हैं। अगर आजीविका के अन्य विकल्प होते तो शायद ऐसा इस हद तक नहीं होता।

भुवनेश्वर : ओडिशा का अंगुल जिला देश का 12 प्रतिशत कोयला उत्पादन करता है। जबकि ओडिशा के कुल कोयला उत्पादन में इसका 56 प्रतिशत योगदान है। इस ज़िले की देश के कोयला उत्पादन में भूमिका के मद्देनजर इंटरनेशनल फॉरम फॉर एनवायरनमेंट, सस्टेनेबिलिटी एंड टेक्नोलॉजी ने एक मूल्यांकन किया और एक रोचक रिपोर्ट जारी की है

कुल वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में परिवहन माध्यमों का 23 प्रतिशत हिस्सा है आइपीसीसी की एक रिपोर्ट बताती है कि वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में ट्रांसपोर्ट सिस्टम की अकेले 23 प्रतिशत हिस्सेदारी है। ट्रासंपोर्ट साधनों से कार्बन उत्सर्जन की इस सकल हिस्सेदारी में अकेेले सड़क परिवहन का 70 प्रतिशत योगदान है। जबकि रेल परिवहन का इसमें मात्र